अस्सी घाट पर वर्षा और कजरी का संगम, विधायक व पद्मश्री ने किया शुभारंभ
वाराणसी। काशी की पावन नगरी में गंगा तट पर रिमझिम वर्षा की बूंदों के साथ घुली कजरी की मिठास बरसाने के लिए शुक्रवार सायंकाल अस्सी घाट स्थित उड़िया आश्रम के मुक्ताकाशी प्रांगण में कजरी उत्सव का आयोजन संपन्न हुआ। संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन वाराणसी एवं सुबह बनारस के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के संगीत प्रेमियों ने जमकर तालियां बजाईं। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि वाराणसी कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव तथा उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय की समिति की सदस्या डॉ. गीता शास्त्री, पूर्व निदेशक डॉ. शोभित नाहर, डॉ. देवेंद्र त्रिपाठी सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान निदेशक लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान उत्तर प्रदेश अतुल द्विवेदी ने अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ प्रदान कर किया अपने संबोधन में विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने काशी को संगीत एवं कला की कर्मभूमि बताते हुए सरकार द्वारा इसके संरक्षण का संकल्प व्यक्त किया। पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य ने कजरी को पहला समाचार पत्र बताते हुए कहा कि यह विधा सबके काज को अभिव्यक्ति देने वाली है। अतुल द्विवेदी ने जिला प्रशासन, सुबह बनारस एवं समस्त अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रीतेश आचार्य ने किया। सुरों का रंग कजरी के संघ में लोकगीत गायिका रंजना राय ने रसपूर्ण कजरी “सावन झर लागे ओ धीरे-धीरे” की मधुर राग के बाद “पिया मेहंदी मंगाई द मोती झिल से जाईके साईकिल से ना कई गाने की प्रस्तुति दी। वर्षा की हल्की बूंदों और गंगा की लहरों के बीच गूंजती कजरी ने पूरे प्रांगण को सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया। यह आयोजन काशी की समृद्ध संगीत परंपरा को जीवंत रखने की दिशा में एक सार्थक प्रयास रहा।