पद से ऊपर कर्तव्य, स्वार्थ से ऊपर सेवा और पहचान से ऊपर राष्ट्रहित”
हिन्दू देव प्रकाश शुक्ला जी
राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय युवा वाहिनी एवं राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर भाजपा
भारत | 25 सितंबर 2026
समाज और राष्ट्र का निर्माण केवल बड़े पदों पर बैठे लोगों से नहीं होता। किसी भी देश की वास्तविक शक्ति उन असंख्य सामान्य नागरिकों में भी होती है, जो बिना किसी पद की अपेक्षा, बिना व्यक्तिगत लाभ की मांग और बिना प्रसिद्धि की इच्छा के अपने स्तर पर समाज के लिए योगदान करते रहते हैं।
आज हमारे बीच ऐसे हजारों-लाखों लोग हैं जो किसी पद की दौड़ में नहीं हैं। उन्हें न सम्मान-पत्र चाहिए, न मंच पर स्थान, न किसी से विशेष सुविधा की अपेक्षा और न ही अपने किए हुए कार्य का प्रचार। वे अपनी क्षमता, समय, ज्ञान और संसाधनों के अनुसार समाज, राष्ट्र और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के लिए कुछ न कुछ करते रहते हैं।
इन लोगों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनके लिए सेवा किसी पद का परिणाम नहीं, बल्कि स्वयं में एक कर्तव्य है।
🇮🇳 पद नहीं, जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है
आज के सार्वजनिक जीवन में पद, प्रतिष्ठा और पहचान को अक्सर सफलता का पैमाना मान लिया जाता है। लेकिन इतिहास बताता है कि अनेक महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन ऐसे लोगों के प्रयासों से भी हुए हैं जिनके पास कोई औपचारिक पद नहीं था।
एक व्यक्ति शिक्षक होकर समाज को दिशा दे सकता है, किसान होकर राष्ट्र की खाद्य व्यवस्था में योगदान दे सकता है, सैनिक होकर सुरक्षा में योगदान दे सकता है, चिकित्सक होकर जीवन बचा सकता है, युवा स्वयंसेवक होकर जरूरतमंदों की सहायता कर सकता है और सामान्य नागरिक भी अपने आसपास ईमानदारी, अनुशासन और जिम्मेदारी का वातावरण बना सकता है।
राष्ट्रसेवा का अधिकार और जिम्मेदारी केवल किसी पदाधिकारी तक सीमित नहीं है।
🕉️ “चाणक्य” की उपमा का अर्थ
यहाँ “चाणक्य” शब्द को किसी व्यक्ति की राजनीतिक शक्ति के अर्थ में नहीं, बल्कि दूरदृष्टि, रणनीतिक सोच, अनुशासन, राष्ट्रहित और कठिन परिस्थितियों में धैर्य के प्रतीक के रूप में समझना चाहिए।
ऐसे व्यक्ति अक्सर अपनी निजी सुविधाओं से अधिक किसी बड़े उद्देश्य के बारे में सोचते हैं। वे समस्याओं को देखकर केवल शिकायत नहीं करते, बल्कि अपनी क्षमता के अनुसार समाधान खोजने का प्रयास करते हैं।
उनकी “वेदना” का अर्थ निराशा नहीं, बल्कि यह बेचैनी है कि समाज बेहतर कैसे बने, आने वाली पीढ़ी सुरक्षित और संस्कारित कैसे हो तथा राष्ट्र अपनी क्षमता के अनुरूप आगे कैसे बढ़े।
ऐसे लोगों की पहचान क्या है?
ऐसे कर्मशील नागरिकों में कुछ सामान्य गुण दिखाई दे सकते हैं—
🔸 वे अपने दायित्व से भागते नहीं हैं।
🔸 व्यक्तिगत लाभ न मिलने पर भी सेवा जारी रखते हैं।
🔸 कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य रखते हैं।
🔸 आलोचना के बावजूद अपने काम पर ध्यान देते हैं।
🔸 समाज की समस्या को केवल किसी दूसरे की जिम्मेदारी नहीं मानते।
🔸 अपनी क्षमता के अनुसार समय, श्रम, ज्ञान या संसाधन देते हैं।
🔸 नई पीढ़ी को शिक्षा, संस्कार और जिम्मेदारी का महत्व समझाते हैं।
🔸 राष्ट्र और समाज के हित को व्यक्तिगत अहंकार से ऊपर रखने का प्रयास करते हैं।
लेकिन इसके साथ एक महत्वपूर्ण बात भी याद रखनी चाहिए—राष्ट्रसेवा का अर्थ किसी अन्य नागरिक, समुदाय या विचार के प्रति घृणा नहीं है।
राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाते हुए संविधान, कानून, मानव गरिमा और दूसरे नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है।
सेवा में प्रसिद्धि आवश्यक नहीं
आज सोशल मीडिया के दौर में हर काम को सार्वजनिक करना आसान है। लेकिन हर सेवा का मूल्य उसकी तस्वीर, पोस्ट या प्रचार से तय नहीं होता।
किसी जरूरतमंद की सहायता करना, किसी बच्चे की पढ़ाई में सहयोग देना, रक्तदान करना, पर्यावरण की रक्षा करना, गौशाला या आश्रम में सेवा करना, बुजुर्गों की सहायता करना, किसी आपदा में राहत पहुँचाना या अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी से जिम्मेदारी निभाना—ये सभी नागरिक योगदान के उदाहरण हो सकते हैं।
हर सेवा को मंच की आवश्यकता नहीं होती।
ऐसे लोगों को पहचानना और सम्मान देना भी समाज की जिम्मेदारी है
जो लोग बिना पद और निजी लाभ की अपेक्षा के लगातार सकारात्मक कार्य कर रहे हैं, उनके प्रयासों को समाज को समझना चाहिए।
लेकिन सम्मान का अर्थ केवल माला, मंच या पद देना नहीं है। कई बार सबसे बड़ा सम्मान यह होता है कि उनके अच्छे कार्यों को आगे बढ़ाया जाए और समाज में ऐसी संस्कृति बनाई जाए जिसमें ईमानदार सेवा को महत्व मिले, दिखावे को नहीं।
🚩 मेरा संदेश
यदि आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है जो चुपचाप समाज के लिए काम कर रहा है, तो उसे केवल इसलिए नजरअंदाज न करें कि उसके पास कोई बड़ा पद नहीं है।
उसके काम को देखिए।
उसकी निष्ठा को समझिए।
उसके योगदान का सम्मान कीजिए।
और यदि संभव हो तो स्वयं भी किसी सकारात्मक कार्य में सहभागी बनिए।
क्योंकि किसी राष्ट्र की शक्ति केवल उसकी संस्थाओं में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों की जिम्मेदारी, ईमानदारी, अनुशासन और सेवा-भावना में भी होती है।
हजारों-लाखों ऐसे कर्मशील नागरिक जब अपने-अपने क्षेत्र में जिम्मेदारी निभाते हैं, तब समाज के भीतर सुधार की संभावनाएँ जीवित रहती हैं।
❤️ उन सभी निस्वार्थ कर्मशील नागरिकों के नाम
जो पद के लिए नहीं, कर्तव्य के लिए काम करते हैं;
जो प्रसिद्धि के लिए नहीं, परिणाम के लिए प्रयास करते हैं;
जो सुविधा के लिए नहीं, जिम्मेदारी के लिए आगे आते हैं;
और जो अपनी क्षमता भर समाज तथा राष्ट्र के लिए सकारात्मक योगदान देते हैं—
उन सभी कर्मयोगियों को हृदय से सम्मान। ❣️
“पद अस्थायी हो सकता है, प्रतिष्ठा बदल सकती है, परिस्थितियाँ आती-जाती रहती हैं; लेकिन कर्तव्य के प्रति ईमानदार प्रयास समाज की स्मृति में लंबे समय तक जीवित रहता है।”
— हिन्दू देव प्रकाश शुक्ला जी
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