भारत में चीन, जापान और सिंगापुर की तरह युवाओं की सुरक्षा के लिए और अधिक सख्त कानून क्यों नहीं?”
हिन्दू देव प्रकाश शुक्ला जी
राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय युवा वाहिनी एवं राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर भाजपा
---आज भारत के सामने एक बहुत गंभीर प्रश्न खड़ा है—क्या हमारे बच्चों और युवाओं को डिजिटल युग के नए खतरों से बचाने के लिए वर्तमान कानून पर्याप्त हैं, या अब समय आ गया है कि भारत एक और मजबूत, स्पष्ट और प्रभावी डिजिटल सुरक्षा कानून बनाए?
आज मोबाइल फोन केवल संचार का माध्यम नहीं रह गया है। सोशल मीडिया, OTT प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन गेमिंग, शॉर्ट वीडियो, इंटरनेट विज्ञापन और डिजिटल मनोरंजन ने बच्चों और युवाओं के जीवन को बहुत प्रभावित किया है।
इन माध्यमों के अनेक सकारात्मक पक्ष हैं—शिक्षा, रोजगार, जानकारी, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता। लेकिन दूसरी ओर अश्लील एवं आयु-अनुपयुक्त सामग्री, साइबरबुलिंग, ऑनलाइन शोषण, नशे को ग्लैमराइज करने वाली सामग्री, हिंसक सामग्री, डिजिटल लत और बच्चों को लक्षित करने वाले हानिकारक कंटेंट जैसी चुनौतियां भी सामने हैं।
भारत सरकार स्वयं इन जोखिमों को स्वीकार कर चुकी है। मार्च 2026 में PIB ने बच्चों के लिए harmful content, cyberbullying और excessive screen time जैसे जोखिमों का उल्लेख करते हुए IT Act, IT Rules और DPDP Act के मौजूदा ढांचे की जानकारी दी थी।
🇮🇳 पहले एक तथ्य स्पष्ट होना चाहिए—भारत में कानून नहीं हैं, ऐसा कहना सही नहीं है
भारत में पहले से ही Information Technology Act, 2000, IT (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021, उनके संशोधन तथा Digital Personal Data Protection Act, 2023 जैसे कानूनी ढांचे मौजूद हैं।
IT Rules में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से संबंधित कई प्रावधान हैं। उदाहरण के लिए, कुछ गंभीर निजी/यौन सामग्री की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, शिकायत निवारण व्यवस्था और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग जैसे प्रावधान मौजूद हैं।
OTT के लिए भी आयु-आधारित वर्गीकरण, content descriptors, parental locks तथा adult-rated content के लिए age-verification जैसी व्यवस्थाओं का प्रावधान है।
और जुलाई 2026 में सरकार ने बताया कि पिछले दो वर्षों में अश्लील सामग्री के संबंध में 50 OTT प्लेटफॉर्म निष्क्रिय किए गए तथा IT Act की धाराओं और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई।
इसलिए असली सवाल केवल यह नहीं है कि “कानून है या नहीं?”
असली सवाल है—
“क्या कानून पर्याप्त रूप से स्पष्ट, आधुनिक, कठोर और प्रभावी ढंग से लागू हो रहा है?”
मेरे विचार से इसी प्रश्न पर गंभीर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए।
---🇸🇬 सिंगापुर से भारत क्या सीख सकता है?
सिंगापुर ने ऑनलाइन सुरक्षा के लिए एक अधिक व्यवस्थित regulatory model विकसित किया है। वहां Online Safety framework के तहत बड़े online communication services पर safety codes लागू किए जाते हैं और बच्चों को harmful तथा inappropriate content से बचाने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं।
सिंगापुर ने app distribution services के लिए भी age-assurance व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम उठाया है। इसका उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि उपयोगकर्ता बच्चा है या वयस्क और आयु-अनुपयुक्त apps तक बच्चों की पहुंच को सीमित करना है।
यहां से भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है—
सिर्फ अपराध होने के बाद कार्रवाई नहीं, बल्कि अपराध और नुकसान को पहले रोकने वाली व्यवस्था भी आवश्यक है।
🇯🇵 जापान का दृष्टिकोण भी महत्वपूर्ण है
जापान में भी बच्चों के इंटरनेट उपयोग को लेकर कानून और नीतियों की लगातार समीक्षा होती रही है। जुलाई 2026 में जापानी सरकार के एक कार्यसमूह ने सोशल मीडिया से जुड़े जोखिम, लंबे समय तक उपयोग और नए डिजिटल/AI जोखिमों को ध्यान में रखते हुए risk assessment, age confirmation और platform governance को मजबूत करने की दिशा पर चर्चा की।
इससे यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल सुरक्षा कोई ऐसा विषय नहीं है जिसमें एक कानून बनाकर सरकार हमेशा के लिए निश्चिंत हो सकती है।
तकनीक बदलती है तो कानून और नियमन को भी बदलना पड़ता है।
🇨🇳 चीन का मॉडल भारत से अलग क्यों है?
चीन में इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सरकार का नियंत्रण भारत की तुलना में काफी अधिक व्यापक है। वहां बच्चों और किशोरों के लिए डिजिटल उपयोग पर कठोर प्रतिबंधों और समय-सीमाओं जैसे उपायों का इस्तेमाल किया गया है।
लेकिन भारत को किसी दूसरे देश का मॉडल ज्यों का त्यों कॉपी नहीं करना चाहिए।
भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है। यहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, निजता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानून के समक्ष समानता जैसे संवैधानिक अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए भारत का मॉडल ऐसा होना चाहिए जिसमें—
बच्चों की सुरक्षा भी हो और संविधान की रक्षा भी।
कठोरता भी हो और न्याय भी।
नियमन भी हो और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी।
---❓ तो भारत में और सख्त कानून बनाने में समस्या क्या है?
मेरे विचार से इसके पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं।
1️⃣ भारत का डिजिटल आकार बहुत बड़ा है
भारत में करोड़ों इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं। प्रतिदिन असंख्य वीडियो, पोस्ट, संदेश और अन्य डिजिटल सामग्री बनती और साझा होती है।
हर सामग्री की मानवीय जांच करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
इसलिए AI-based detection, automated moderation और मजबूत शिकायत प्रणाली के साथ मानव समीक्षा भी आवश्यक है।
2️⃣ सिर्फ कानून बनाने से समस्या समाप्त नहीं होती
कठोर कानून तभी प्रभावी होगा जब—
शिकायत दर्ज करना आसान हो,
पुलिस और साइबर सेल सक्षम हों,
डिजिटल फॉरेंसिक क्षमता मजबूत हो,
प्लेटफॉर्म समय पर कार्रवाई करें,
अपराधियों की पहचान हो,
अदालतों में मामलों का शीघ्र निपटारा ह