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🇮🇳🚩 राष्ट्रीय अध्यक्ष का विशेष महिला-जागरूकता एवं वैचारिक वक्तव्य 🚩🇮🇳


“अंतरधार्मिक विवाह से पहले भावनाओं के साथ-साथ कानून, अधिकार और वैवाहिक व्यवस्था की पूरी जानकारी भी जरूरी है”

“प्रेम व्यक्तिगत अधिकार है, लेकिन विवाह जीवन का दीर्घकालिक निर्णय है—इसलिए निर्णय लेने से पहले हर लड़की को अपने अधिकार और संभावित कानूनी-सामाजिक परिणाम समझने चाहिए।”

हिन्दू देव प्रकाश शुक्ला जी

राष्ट्रीय अध्यक्ष

राष्ट्रीय युवा वाहिनी एवं राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर भाजपा

🚩 मेरी बेटियों और बहनों से एक स्पष्ट अपील

आज के समय में प्रेम और अंतरधार्मिक विवाह को लेकर समाज में बहुत चर्चा होती है। मेरा उद्देश्य किसी धर्म के युवक या किसी समुदाय की प्रत्येक महिला/पुरुष को दोषी ठहराना नहीं है।

लेकिन मैं हर युवती से एक गंभीर सवाल जरूर पूछना चाहता हूँ—

क्या आपने विवाह करने से पहले केवल अपने साथी को समझा है, या उस विवाह से जुड़े धार्मिक, कानूनी और व्यक्तिगत अधिकारों को भी समझा है?

केवल प्रेम, आकर्षण या भावनात्मक लगाव के आधार पर विवाह का निर्णय नहीं होना चाहिए।

विवाह के साथ—

कानूनी अधिकार,

तलाक के नियम,

भरण-पोषण,

बच्चों की अभिरक्षा,

उत्तराधिकार,

धार्मिक पहचान,

विवाह का पंजीकरण,

व्यक्तिगत कानून,

और भविष्य में अलगाव की स्थिति

जैसे अनेक महत्वपूर्ण प्रश्न जुड़े होते हैं।

⚖️ 1. “निकाह” को समझना जरूरी है

निकाह का अर्थ मुस्लिम विवाह से है।

दि कोई हिंदू युवती किसी मुस्लिम युवक से विवाह करने का निर्णय लेती है, तो उसे पहले यह स्पष्ट रूप से समझना चाहिए कि विवाह किस कानूनी व्यवस्था के अंतर्गत किया जाएगा।

भारत में अंतरधार्मिक विवाह के लिए Special Marriage Act, 1954 भी एक कानूनी रास्ता प्रदान करता है।

इसलिए किसी लड़की को यह जानकारी होनी चाहिए कि—

वह किस कानून के अंतर्गत विवाह कर रही है?

क्या विवाह का विधिवत पंजीकरण होगा?

क्या दोनों पक्ष विवाह की शर्तों को लिखित रूप में समझते हैं?

भविष्य में विवाद होने पर उसके कानूनी अधिकार क्या होंगे?

इन प्रश्नों को विवाह से पहले पूछना किसी धर्म का अपमान नहीं है।

यह महिला जागरूकता है।

⚠️ 2. निकाह-हलाला के विषय में वास्तविक जानकारी जरूरी है

निकाह-हलाला एक अत्यंत विवादित विषय है और इसे सोशल मीडिया के नारों के आधार पर समझना गलत होगा।

भारत में निकाह-हलाला और अन्य मुस्लिम वैवाहिक प्रथाओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उठ चुकी हैं। 2018 के सुप्रीम कोर्ट रिकॉर्ड में निकाह-हलाला, निकाह-मुताह, निकाह-मिस्यार और बहुविवाह से संबंधित चुनौती का उल्लेख है।

इसलिए किसी युवती को यह समझना चाहिए कि इंटरनेट पर चलने वाली हर बात कानून या हर मुस्लिम परिवार की वास्तविक प्रथा नहीं होती।

सबसे महत्वपूर्ण बात—किसी भी महिला को जबरन किसी धार्मिक या वैवाहिक व्यवस्था में धकेला नहीं जाना चाहिए।

विवाह में उसकी स्वतंत्र सहमति और गरिमा सर्वोपरि होनी चाहिए।

⚠️ 3. “मुताह” के बारे में भी भ्रम नहीं होना चाहिए

निकाह-मुताह एक अलग प्रकार की अस्थायी विवाह-व्यवस्था के रूप में इस्लामी विधि के कुछ मतों में चर्चा में आती है; यह सभी मुसलमानों द्वारा स्वीकार की जाने वाली समान प्रथा नहीं है। भारत में इससे संबंधित कानूनी प्रश्नों को भी न्यायालयों के समक्ष उठाया गया है।

इसलिए किसी हिंदू लड़की को विवाह से पहले यह समझने का पूरा अधिकार है कि—

उसका होने वाला पति किस धार्मिक/कानूनी परंपरा को मानता है और विवाह उसके लिए वास्तव में क्या अर्थ रखता है।

लेकिन इसी आधार पर हर मुस्लिम पुरुष या पूरे मुस्लिम समुदाय को एक जैसा मान लेना भी तथ्यात्मक रूप से गलत होगा।

🚨 4. “खतना” के विषय में भी तथ्य समझें

“खतना” शब्द का अर्थ संदर्भ के अनुसार अलग हो सकता है।

पुरुषों में circumcision कुछ मुस्लिम समुदायों में धार्मिक/सांस्कृतिक प्रथा है, लेकिन इसे हर मुस्लिम विवाह की अनिवार्य शर्त बताना सही नहीं है।

महिलाओं के संबंध में जिस प्रथा को female genital mutilation/cutting कहा जाता है, वह अलग और गंभीर मानवाधिकार विषय है और इसे सभी मुस्लिम समुदायों की सामान्य प्रथा के रूप में प्रस्तुत करना भी गलत होगा।

इसलिए युवतियों को सोशल मीडिया की सनसनी के बजाय विश्वसनीय धार्मिक, चिकित्सकीय और कानूनी स्रोतों से जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।

⚖️ 5. तीन तलाक के बारे में भी सही जानकारी रखें

यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी तथ्य समझना आवश्यक है।

भारत में Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) Act, 2019 के तहत पति द्वारा तत्काल और अपरिवर्तनीय तलाक के रूप में “तलाक” का उच्चारण—जिसे कानून में talaq-e-biddat या समान प्रभाव वाला तत्काल तलाक कहा गया है—void और illegal घोषित किया गया है। कानून में इसके लिए दंड का भी प्रावधान है।

इसलिए आज की भारतीय कानूनी स्थिति को पुरानी या सोशल मीडिया की अधूरी जानकारी के आधार पर नहीं समझना चाहिए।

👩‍⚖️ 6. शादी से पहले लड़की को ये सवाल जरूर पूछने चाहिए

यदि कोई युवती किसी मुस्लिम युवक से विवाह करने का निर्णय लेती है, तो मैं कहूंगा कि वह भावनाओं के साथ-साथ ये प्रश्न भी स्पष्ट रूप से पूछे—

❓ धर्म और व्यक्तिगत जीवन

1. क्या विवाह के बाद धर्म बदलने की अपेक्षा होगी?

2. क्या धर्म परिवर्तन उसकी अपनी स्वतंत्र इच्छा से होगा?

3. बच्चों की धार्मिक परवरिश कैसे होगी?

4. क्या उसे अपने माता-पिता और परिवार से उसी प्रकार संबंध रखने की स्वतंत्रता होगी?

❓ विवाह और कानून

5. विवाह किस कानून के अंतर्गत होगा?

6. क्या विवाह विधिवत पंजीकृत होगा?

7. भविष्य में तलाक की स्थिति में अधिकार क्या होंगे?

8. भरण-पोषण और बच्चों की अभिरक्षा का क्या प्रावधान होगा?

❓ परिवार और सामाजिक जीवन

9. क्या पति का परिवार उसके करियर और शिक्षा का सम्मान करेगा?

10. क्या उसे नौक