सरकार व्यस्त, पेंशनर त्रस्त: 12 सूत्रीय मांगों को लेकर पेंशनरों ने भरी हुंकार

वाराणसी। सेवा निवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर एसोसिएशन तथा अखिल भारतीय राज्य कर्मचारी पेंशनर फेडरेशन के संयुक्त आह्वान पर गुरुवार को शास्त्री घाट, वरुणा पुल कचहरी पर पेंशनरों ने 12 सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी धरना दिया। धरना के दौरान पेंशनरों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए मांगों के शीघ्र निस्तारण की मांग की वक्ताओं ने कहा कि सरकार पेंशनरों को भार समझकर उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रही है। पेंशनरों के स्थापित अधिकारों से वंचित करने और उनके बीच विभेद पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 25 मार्च 2025 को सिविल पेंशन नियम में किए गए संशोधन से पेंशनरों के भविष्य को प्रभावित किया गया है। उन्होंने आठवें वेतन आयोग के दायरे में पुराने पेंशनरों को शामिल करने की मांग उठाई पेंशनरों ने महंगाई के अनुरूप महंगाई राहत निर्धारित करने के लिए भारत सरकार के वर्ष 2008 के गजट के अनुसार अलग मूल्य सूचकांक बनाने, पेंशन के राशिकरण की कटौती 10 वर्ष में समाप्त करने तथा 80 और 100 वर्ष की आयु पर मिलने वाली पेंशन वृद्धि की व्यवस्था में बदलाव कर सेवानिवृत्ति के बाद प्रत्येक पांच वर्ष में पांच प्रतिशत पेंशन वृद्धि किए जाने की मांग की धरना में कोविड काल के दौरान रोकी गई 18 माह की महंगाई राहत शीघ्र जारी करने की भी मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि इससे अल्प आय वाले पेंशनरों की क्रय शक्ति बढ़ेगी और बाजार की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी पेंशनरों ने बुजुर्गों की समस्याओं के समाधान और उनके कल्याण के लिए अलग वरिष्ठ नागरिक पेंशनर आयोग गठित करने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया गया है धरना को श्यामधनी, उमाकांत पांडेय, डॉ. निरंजन श्रीवास्तव, मदन मोहन, डॉ. श्रीकांत पांडेय, राजेश पांडेय, सीताराम, राकेश दीक्षित, गोपाल जी यादव, राजेंद्र, इंजीनियर राधेश्याम पटेल, इंजीनियर सोमरू पांडेय, छोटेलाल, अशोक सिंह, महिमा दत्त द्विवेदी, सहदेव तिवारी, डॉ. राम अवतार यादव और प्रमोद कुमार श्रीवास्तव आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता वीरेंद्र सिंह तथा संचालन अशोक सिंह ने किया। धरना में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में पेंशनर मौजूद रहे।