100 साल की दादी की अंतिम विदाई बनी पोतों का अंतिम सफर

मेरठ में 100 साल की दादी के अंतिम संस्कार के बाद गंगा में नहा रहे चार चचेरे भाई डूब गए। दो घरों के चिराग बुझ गए। चारों की मां का रो-रोकर बुरा हाल है। चार चचेरे भाइयों के एक साथ गंगा में डूबने की खबर ने दो सगे भाइयों के हंसते-खेलते संसार को उजाड़ कर रख दिया है।

मेरठ के इंचौली थाना इलाके के जलालपुर गांव के एक ही परिवार के तीन किशोर और एक युवक गंगा नदी में डूब गए। चारों युवक चचेरे भाई हैं। एक अन्य युवक को डूबने से बचा लिया गया। देर रात तक चले सर्च ऑपरेशन में चारों का सुराग नहीं लग सका। घटना शुक्रवार को दोपहर में करीब 3:30 बजे हस्तिनापुर के मखदूमपुर गंगा घाट पर हुई।

पुलिस ने बताया कि डूबने वाले तीन किशोर और युवक 100 वर्षीय दादी भगवती देवी के अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे। अंतिम संस्कार के बाद चारों एक अन्य परिजन प्रदीप के साथ गंगा नदी में स्नान करने लगे। नहाते समय सभी गहरे पानी में चले गए। 


चारों की मां का रो-रोकर बुरा हाल

मखदूमपुर घाट पर चार भाइयों के गंगा में डूबने के हादसे के बाद से जलालपुर गांव का हर घर शोक में डूबा है, हर आंख से बस आंसू बह रहे हैं। सैनी परिवार के चार चचेरे भाइयों के एक साथ गंगा में डूबने की खबर ने दो सगे भाइयों के हंसते-खेलते संसार को उजाड़ कर रख दिया है। चारों भाइयों की माताओं का रो-रोकर बुरा हाल है।


मातम में डूबा गांव, मां बोली- गंगा मैया मुझे ले जाओ... बच्चे लौटा दो

अभिषेक और हिमांशु की मां बिजेंद्री बेटों के कपड़ों को सीने से लगाकर बार-बार बेसुध हो रही हैं। सोनू की पत्नी मुनेश का विलाप सुनकर ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गई। मुनेश बार-बार एक ही गुहार लगा रही थीं गंगा मैया मुझे ले जाओ, मेरे बच्चों को लौटा दो। 

हादसे में कमल सिंह सैनी के दो बेटे अभिषेक और हिमांशू, उनके छोटे भाई सोनू के दो बेटे प्रियांशु और दीपांशु गंगा की लहरों में समा गए। उनकी एक छोटी बेटी प्रियांशी है। प्रियांशी ने बताया कि चारों भाई पढ़ाई में बहुत होनहार थे।


दादी की अंतिम विदाई बन गई पोतों का अंतिम सफर 

यह हादसा उस वक्त हुआ जब जलालपुर निवासी सैनी परिवार अपनी बुजुर्ग दादी भगवती देवी (100 वर्ष) के निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार करने मखदुमपुर घाट गया था। मूल रूप से हापुड़ के मुकीमपुर निवासी भगवती देवी के पति मोतीलाल की 35 वर्ष पूर्व मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद से वह अपनी बड़ी बेटी राजवीरी के बेटे हरवीर के साथ जलालपुर में ही रह रही थीं।

परिवार ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि दादी को विदाई देने गया यह सफर घर के चार होनहार युवाओं के लिए भी अंतिम सफर साबित होगा। घटना की जानकारी मिलते ही ग्राम प्रधान और भारी संख्या में ग्रामीण मखदुमपुर घाट पहुंचे।

मेरा सब कुछ खत्म हो गया

दीपांशु व प्रियांशु के पिता सोनू गंगा किनारे बिलखते हुए बार-बार यही कहते रहे कि अब उनका सब कुछ खत्म हो गया। उनके दोनों बेटे ही उनकी जिंदगी का सहारा थे। अब घर में केवल इकलौती बेटी दिव्यांशी ही बची है।