वाराणसी। उत्तर प्रदेश के लगभग 36 हजार ग्राम रोजगार सेवकों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। रोजगार सेवकों ने नियमितीकरण, राज्य कर्मचारी का दर्जा, मानदेय वृद्धि तथा बकाया भुगतान सहित 10 सूत्रीय मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि ग्राम रोजगार सेवक पिछले 17 वर्षों से मनरेगा सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन आज भी संविदा व्यवस्था के तहत अल्प मानदेय पर कार्य करने को विवश हैं।
रोजगार सेवकों ने मांग की है कि उन्हें सहायक सचिव/ग्राम विकास सहायक के पद पर समायोजित किया जाए तथा न्यूनतम 24 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाए। इसके अलावा बकाया वेतन का तत्काल भुगतान, अवकाश सुविधा, स्वास्थ्य एवं ईपीएफ लाभ, स्थानांतरण नीति लागू करने तथा मृतक आश्रित को नौकरी देने जैसी मांगें भी प्रमुख रूप से उठाई गई हैं।
ज्ञापन के माध्यम से चेतावनी दी गई है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 1 जुलाई 2026 को लखनऊ में विधानसभा घेराव किया जाएगा। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन और आंदोलन भी किया जाएगा। रोजगार सेवकों ने कहा कि आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।