प्रेमचंद की भाषा सरल, प्रभावशाली और संवेदनशील है,जो पाठकों को सीधे पात्रों के भाव-जगत से जोड़ती है। ‘विद्रोही’ आज भी सामाजिक चेतना, आत्मसम्मान और परिवर्तन की प्रेरणा देने वाली अत्यंत प्रासंगिक हैं । कहानी समाज की जड़ रूढ़ियों और अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बन जाता है। उक्त कथन शिवकुमार पराग द्वारा काव्यपाठ की प्रेमचंद की जन्मभूमि लमही गूंजी प्रेमचंद की कहानी विद्रोही का पाठन संकल्प ने
वाराणसी के लमही स्थित प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट द्वारा आयोजित साप्ताहिक साहित्यिक कार्यक्रम “सुनो मैं प्रेमचंद” के 1945 वा दिवस संपन्न हुआ। कार्यक्रम में स्थानीय साहित्यप्रेमियों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक साहित्यप्रेमी, और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन आयुषी दूबे ने किया, सभी का स्वागत राजेश श्रीवास्तव व धन्यवाद ज्ञापन प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव ने किया।