नियमों को दर-किनार कर बेसिक शिक्षा विभाग भेज रहा आरटीई के अपात्र एडमिशन-

लखनऊ. अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग नियमों को किनारे कर निजी विद्यालयों में जबरन प्रवेश लेने का दबाब बना रहा है। लाभार्थी की सही जानकारी प्राप्त करने के लिए विभाग की आरटीई लिस्ट तथा स्टूढेप्ट स्टेटस का खुलना जरूरी है। इसी से चयनित बच्चे की सत्यता पता चलती है। विभाग की वेब-साइट इस बार जबसे आदटीई प्रवेश की प्रक्रिया आरम्भ हुयी है तब से आज तक नहीं खुली है, और विभाग ने भी इस दिशा में आज तक कोई सार्थक कदम नहीं उठाया है। बेसिक शिक्षा विभाग अपना पल्ला एनआईसी पर झाड़ रहा है कि वेब-साइट को ठीक करना एनआईसी का काम है।  


नियमों को दर-किनार कर रहे विभाग के अधिकारी- बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी नियमों से परे  आरटीई के एडमिशन निजी विद्यालयों में भेज रहे है साथ ही फोन कर जबरन प्रवेश लेने को कहते है। आरटीई  एडमिशन के  नियमानुसार पहले से कियी निजी विद्यालय में पढ़ रहे बच्चें का आरटीई के तहत प्रवेश नहीं हो सकता है। परन्तु विभाग की मेहरबानी सं बच्चा जिस निजी विद्यालय में पहले से पढ़ रहा है उसी निजी विद्यालय में बच्चें को आरटीई में प्रवेश लेने के जिए भेज दिया। साथ ही फोन कर बच्चे का प्रवेश लेने का दबाब भी बना रहे है।  विभागीय भ्रष्टाचार के चलते अपात्रों के अभिभावक प्रतिदिन विद्यालय आकर प्रवेश लेने के लिए दबाब बनाते है तथा झगड़ा भी करते है। ।

फर्जी आय प्रमाण पत्रों की विभाग नहीं करता जांच- 

शिक्षा का अधिकार के लहत अलाभित समूह तथा दुर्बल आय वर्ब के बच्चे को आरटीई के तहत निःशुल्क शिक्षा का अधिकार होता है। नियमानुसार ऐसे अभिभावकों के पास बीपीएल राशन राशन कार्ड होना चाहिए। जो सामान्यतः किसी के पास नहीं होता है। परंतु 60,000 या 80,000 रूपये वार्षिक आय का फर्जी प्रमाण पत्र बनवा के ये दुर्बल आय वर्ग के बन कर आरटीई के तहत आवेदन कर देते है। और विभाग न तो आय प्रमाण  या निवास प्रमाण पत्र की कोई जांच करता है। बस लाटरी में नाम निकाल कर निजी स्कूलों में भेज देता है। वास्तव में एक ई-रिक्शा चलाने वाला भी प्रतिदिन का एक हजार रूपये तथा वार्षिक तीन लाख से अधिक कमाता है। किर भी समाज में अच्छी हैसियत रखने वाले, अच्छी नौकरी करने वाले भी विभागीय भ्रष्टाचार के चलत दुर्बल आय वर्ग का बनकर सर्वथा पात्र बच्चों के हक पर डाका डाल रहे है।