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  • Sanatan Sanstha Provides Information on the Classical Beliefs of Narayan Bali, Naga Bali, and Tripindi Shraddha

नारायणबलि, नागबलि और त्रिपिंडी श्राद्ध की शास्त्रीय मान्यताओं पर सनातन संस्था ने दी जानकारी

वाराणसी। सनातन संस्था की ओर से नारायणबलि, नागबलि एवं त्रिपिंडी श्राद्ध के संबंध में आध्यात्मशास्त्रीय विवेचना प्रस्तुत की गई है। संस्था के अनुसार इन अनुष्ठानों का उद्देश्य पितरों को सद्गति प्राप्त होने तथा उनसे संबंधित माने जाने वाले दोषों के निवारण के लिए धार्मिक परंपरा के अनुसार विधि करना है संस्था के अनुसार नारायणबलि और नागबलि को काम्य अनुष्ठान माना गया है और इन्हें विवाहित दंपति के साथ-साथ अविवाहित व्यक्ति भी कर सकते हैं। महिलाओं के लिए माहवारी तथा गर्भावस्था के पांचवें महीने के बाद इन अनुष्ठानों को न करने की बात कही गई है। घर में विवाह, यज्ञोपवीत जैसे शुभ कार्य अथवा किसी सदस्य की मृत्यु होने पर एक वर्ष तक अनुष्ठान न करने की जानकारी दी गई है नारायणबलि को दुर्घटना अथवा आत्महत्या से मृत्यु होने और विधिवत क्रियाकर्म न होने से संबंधित मान्यता के संदर्भ में बताया गया है। संस्था के अनुसार यह अनुष्ठान प्रेतयोनि से मुक्ति एवं सद्गति की कामना से किया जाता है। इसके लिए शुक्ल पक्ष की एकादशी-द्वादशी, श्रवण नक्षत्र, पंचमी अथवा पुत्रदा एकादशी को उपयुक्त माना गया है। नदी तट जैसे पवित्र स्थान पर विधि करने की परंपरा बताई गई है वहीं, नागबलि को पूर्वजों से संबंधित नागहत्या के दोष के निवारण तथा संतान प्राप्ति की कामना से जुड़ी धार्मिक मान्यता के रूप में बताया गया है। संस्था के अनुसार इसी कारण नारायणबलि और नागबलि को साथ करने की परंपरा है।