दिव्यांग कोटे की दुकान सामान्य व्यक्ति को देने का आरोप, ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की भूमिका पर सवाल — सरकारी योजना की निष्पक्ष जांच की मांग*
*मंडल प्रभारी अवनीत कुमार शर्मा*
रामपुर/मिलक। सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए शासन की ओर से तमाम प्रयास किए जाते हैं, लेकिन यदि इन्हीं योजनाओं में पात्रों के अधिकारों की अनदेखी होने लगे तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। रामपुर जनपद की तहसील मिलक क्षेत्र के धमोरा में शासन की ओर से बनाए गए सरकारी प्रगति मॉल में दुकान आवंटन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं आरोप है कि प्रगति मॉल में एक दुकान दिव्यांग श्रेणी के पात्र व्यक्ति के लिए आवंटित की जानी थी, लेकिन कथित तौर पर उस दुकान का आवंटन किसी सामान्य व्यक्ति को कर दिया गया। यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह पात्र लाभार्थी के अधिकारों की अनदेखी और आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है *दिव्यांग के हक पर किसने लगाया ग्रहण मामले में ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि सरकारी प्रगति मॉल में दुकान आवंटित करते समय दिव्यांग श्रेणी के लिए निर्धारित प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुकान आवंटन किस आधार पर किया गया और क्या निर्धारित नियमों के अनुसार पात्र व्यक्ति को उसका अधिकार दिया गया *सरकारी प्रगति मॉल के आवंटन की हो निष्पक्ष जांच इस मामले में संबंधित अधिकारियों से मांग की जानी चाहिए कि धमोरा स्थित सरकारी प्रगति मॉल की दुकानों के आवंटन से जुड़े सभी अभिलेखों की जांच कराई जाए। आवंटन सूची, पात्रता संबंधी दस्तावेज, आरक्षण के प्रावधान और संबंधित अधिकारियों की संस्तुतियों की समीक्षा की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके यदि जांच में अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए और पात्र दिव्यांग लाभार्थी को न्याय दिलाने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।
*शासन-प्रशासन से उठे ये अहम सवाल*
* *क्या दुकान दिव्यांग श्रेणी के लिए आरक्षित या निर्धारित थी*
* *यदि हां, तो सामान्य व्यक्ति को आवंटन किस नियम के तहत किया गया*
* *आवंटन प्रक्रिया में ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की क्या भूमिका रही*
* *क्या पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदारी तय की जाएगी*
अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हैं या नहीं। सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और पात्र लाभार्थियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
महत्वपूर्ण: अभी यह मामला आरोपों के स्तर पर है। ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव या किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ अनियमितता की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही मानी जानी चाहिए।
*हाइलाइट न्यूज़*
रामपुर के धमोरा में सरकारी प्रगति मॉल की दुकान के आवंटन पर बवाल! दिव्यांग कोटे की दुकान सामान्य व्यक्ति को देने का आरोप, ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की भूमिका पर सवाल। सरकारी रिकॉर्ड खंगालने और निष्पक्ष जांच कराने की उठी मांग!