वायलिन-तबला की जुगलबंदी और कथक की मनमोहक प्रस्तुति से सजी सांस्कृतिक संध्या
वाराणसी, जिला प्रशासन की अभिनव सांस्कृतिक पहल ‘सुबह-ए-बनारस’ के अंतर्गत आयोजित ‘घाट संध्या’ कार्यक्रम में रविवार को सुर, साधना और बनारस घराने की थाप का अद्भुत संगम देखने को मिला। संगीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने घाट पर मौजूद दर्शकों को देर तक मंत्रमुग्ध किए रखा कार्यक्रम के प्रथम चरण में कोलकाता से पधारे युवा वायलिन वादक सौपर्णो घोष ने वायलिन की मधुर धुनों से प्रस्तुति का शुभारंभ ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ एवं ‘रघुपति राघव’ से किया। वहीं प्रस्तुति का समापन ‘शिव कैलाशों के वासी’ से हुआ। तबला वादक सुमन सरकार ने संगत प्रदान की। वायलिन और तबले की शानदार जुगलबंदी ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया द्वितीय चरण में वाराणसी की सुनिधि पाठक ने उत्तर भारत की प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य शैली कथक की प्रस्तुति दी। उन्होंने देवी स्तुति से नृत्य का शुभारंभ करते हुए धमार ताल की प्रस्तुति दी और ताल-ठुमरी के साथ समापन किया। पद, लय, ताल, अंग-संचालन और घुंघरुओं की झंकार के सुंदर समन्वय ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया कार्यक्रम के दौरान कलाकारों को प्रमाण पत्र एवं आशीर्वचन अभिजीत दीक्षित, निदेशक, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, वाराणसी क्षेत्र; समाजसेवी एवं सुरगंगा के आयोजक आलोक पारिख, धर्मवीर यादव, पी.के. श्रीवास्तव, के.के. श्रीवास्तव, प्रवीण कुमार केसरी (चार्टर्ड अकाउंटेंट) एवं अपराजिता केसरी (चार्टर्ड अकाउंटेंट, प्रयागराज) द्वारा प्रदान किए गए कार्यक्रम का संयोजन ‘सुबह-ए-बनारस’ के संस्थापक सचिव डॉ. रत्नेश वर्मा ने किया, जबकि सफल संचालन सीमा केसरी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन श्याम कुमार केसरी ने किया इस अवसर पर डॉ. प्रेम नारायण सिंह सहित बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे और उन्होंने सुर, ताल एवं नृत्य से सजी इस सांस्कृतिक संध्या का आनंद लिया।