🇮🇳🚩 राष्ट्रीय अध्यक्ष का विशेष तथ्यात्मक एवं वैचारिक वक्तव्य 🚩🇮🇳

देश की राजनीति सवालों से बदलेगी, आगजनी और विदेशी इशारों से नहीं”

हिन्दू देव प्रकाश शुक्ला जी

राष्ट्रीय अध्यक्ष

राष्ट्रीय युवा वाहिनी एवं राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर भाजपा आज देश में सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसे दावे और व्यंग्यात्मक कथन तेजी से प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें कुछ लोगों को विदेशी शक्तियों द्वारा वित्तपोषित, किसी विदेशी खुफिया एजेंसी की कठपुतली तथा देश में सत्ता परिवर्तन के लिए सक्रिय बताया जाता है।

ऐसे गंभीर आरोपों पर मेरा स्पष्ट मत है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक राष्ट्र में किसी भी व्यक्ति, संगठन या आंदोलन पर देशविरोधी गतिविधियों, विदेशी वित्तपोषण अथवा तख्तापलट की साजिश का आरोप केवल सोशल मीडिया पोस्ट, मीम या राजनीतिक भाषण के आधार पर नहीं लगाया जाना चाहिए। उसके लिए दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड, आधिकारिक जांच और विश्वसनीय प्रमाण सामने आने चाहिए। लेकिन इसके साथ ही एक और बात उतनी ही स्पष्ट है— यदि कोई व्यक्ति वास्तव में विदेशी धन, विदेशी निर्देश या किसी गुप्त नेटवर्क के माध्यम से भारत की संवैधानिक व्यवस्था को अस्थिर करने, हिंसा फैलाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने अथवा लोकतांत्रिक सत्ता परिवर्तन के लिए गैरकानूनी रास्ता अपनाने की कोशिश करता है, तो यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं रहेगा; यह राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का गंभीर विषय बन जाएगा।

देश जलाने की राजनीति किसी भी विचारधारा की नहीं हो सकती

भारत में सरकार बदलने का अधिकार जनता के पास है।

यह अधिकार मतपत्र के माध्यम से प्रयोग किया जाता है,

आगजनी के माध्यम से नहीं।

यह अधिकार संवैधानिक प्रक्रिया से आता है,

हिंसा और अराजकता से नहीं।

यह अधिकार जनता के जनादेश से आता है,

विदेशी शक्ति के कथित निर्देशों से नहीं।

जो व्यक्ति सत्ता परिवर्तन चाहता है, उसे जनता के बीच जाना चाहिए, अपने विचार रखने चाहिए, संगठन खड़ा करना चाहिए और लोकतांत्रिक चुनाव लड़ना चाहिए।

लेकिन यदि कोई यह कहे कि—

«“हम देशभर में घूमेंगे, देश को जलाएँगे और तख्तापलट करेंगे”»

तो ऐसी भाषा लोकतांत्रिक असहमति की सीमा से बाहर जाती है और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी बनती है।

विदेशी फंडिंग पर भी दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए

विदेश से आने वाले धन की वैधता, स्रोत और उपयोग की जांच भारतीय कानूनों के अनुसार होनी चाहिए।

यदि कोई संस्था वैध रूप से विदेशी योगदान प्राप्त करती है, तो उसे केवल विदेशी धन प्राप्त करने के कारण देशद्रोही कहना उचित नहीं है।

और यदि किसी संस्था या व्यक्ति द्वारा विदेशी धन का गैरकानूनी या प्रतिबंधित उपयोग सिद्ध होता है, तो कार्रवाई प्रमाण और कानून के आधार पर होनी चाहिए।

इसी प्रकार “CIA की कठपुतली”, “विदेशी एजेंट”, “रégime change की साजिश” जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी प्रमाण के बिना नहीं किया जाना चाहिए।

हमारा राष्ट्रवाद प्रमाण और संविधान दोनों पर आधारित होना चाहिए

राष्ट्रवाद का अर्थ केवल नारे लगाना नहीं है।

राष्ट्रवाद का अर्थ है—

🇮🇳 भारत की संप्रभुता की रक्षा

🇮🇳 संविधान और कानून का सम्मान

🇮🇳 राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सजगता

🇮🇳 सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा

🇮🇳 सामाजिक शांति बनाए रखना

🇮🇳 लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान

🇮🇳 और देशहित को व्यक्तिगत अथवा राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर रखना।

हम किसी भी प्रकार की हिंसा, आगजनी, सार्वजनिक संपत्ति के विनाश और गैरकानूनी सत्ता परिवर्तन का समर्थन नहीं करते।

हम यह भी कहते हैं कि किसी भी राजनीतिक विरोध को केवल विदेशी साजिश बताकर खारिज करना भी उचित नहीं है। यदि जनता में असंतोष है तो उसके वास्तविक कारणों को समझना और लोकतांत्रिक तरीके से उनका समाधान करना आवश्यक है।

भारत किसी विदेशी कठपुतली का मंच नहीं है

भारत की जनता इतनी सक्षम है कि वह अपने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और विधायक स्वयं चुन सकती है।

भारत के राजनीतिक भविष्य का निर्णय—

वॉशिंगटन, मॉस्को, बीजिंग या किसी विदेशी एजेंसी के कार्यालय में नहीं, बल्कि भारत की जनता के बीच और संवैधानिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए।

इसलिए मेरा स्पष्ट आह्वान है—

विचार से मुकाबला कीजिए, हिंसा से नहीं।

तर्क से जवाब दीजिए, अफवाह से नहीं।

प्रमाण प्रस्तुत कीजिए, आरोप नहीं।

जनता के बीच जाइए, विदेशी शक्तियों के सहारे नहीं।

सत्ता चाहिए तो चुनाव लड़िए, देश मत जलाइए।

भारत की एकता, अखंडता, शांति और संवैधानिक लोकतंत्र से बड़ा कोई राजनीतिक लक्ष्य नहीं हो सकता।

भारत माता की जय। 🇮🇳

वंदे मातरम्। 🚩

हिन्दू देव प्रकाश शुक्ला जी

राष्ट्रीय अध्यक्ष

राष्ट्रीय युवा वाहिनी एवं राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर भाजपा