खखरेरू /फतेहपुर विजयीपुर विकासखंड के ग्राम सभा कठरिया स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं पिछले करीब चार महीनों से पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। विद्यालय में पानी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण मासूम बच्चों को प्यास बुझाने के लिए विद्यालय से कुछ दूरी पर स्थित पुराने कुएं का सहारा लेना पड़ रहा है। बच्चे रस्सी के सहारे बाल्टी डालकर स्वयं पानी निकालते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रदेश सरकार जहां परिषदीय विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, वहीं कठरिया का यह विद्यालय उन दावों की हकीकत बयां करता नजर आ रहा है। विद्यालय परिसर में पेयजल की व्यवस्था ठप होने से छात्र-छात्राओं का काफी समय कुएं से पानी निकालने में ही व्यतीत हो जाता है, जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर भी पड़ रहा है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रदीप कुमार ने बताया कि लगभग चार माह पूर्व विद्यालय में लगी पानी की मोटर को प्रधान प्रतिनिधि खोलकर अपने साथ ले गए थे। इसके बाद से विद्यालय में पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह बाधित हो गई। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार मासिक बैठक के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी एवं खंड विकास अधिकारी को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं कराया गया।
प्रधानाचार्य के अनुसार विद्यालय में वर्तमान समय में 60 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। पेयजल के अभाव में बच्चों को रोजाना कुएं से पानी निकालना पड़ता है। ऐसे में किसी भी समय कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है। अभिभावकों में भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय जैसे संवेदनशील स्थान पर पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। उनका कहना है कि यदि समय रहते पानी की व्यवस्था नहीं कराई गई और कोई अप्रिय घटना हो गई तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।