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  • Villagers' anger erupts over the absence of a doctor; sit-in protest held at the PHC; Rakshpalpur-Ajhuwa road blocked for an hour.

डॉक्टर न मिलने पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, पीएचसी पर धरना; एक घंटे तक जाम रहा रक्षपालपुर-अझुवा मार्ग

 खखरेरू /फतेहपुर धाता विकासखंड के मुबारकपुर गेरिया स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से चिकित्सक की तैनाती न होने से नाराज ग्रामीणों और हिंदू सुरक्षा परिषद के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोगों ने नारेबाजी करते हुए रक्षपालपुर-अझुवा मार्ग को करीब एक घंटे तक जाम कर दिया। पुलिस और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद जाम समाप्त कराया जा सका।

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2022 में स्थापित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पिछले करीब एक वर्ष से नियमित चिकित्सक की तैनाती नहीं है। इसके चलते क्षेत्र की लगभग डेढ़ लाख आबादी को प्राथमिक उपचार समेत अन्य चिकित्सकीय सुविधाओं के लिए 15 से 20 किलोमीटर दूर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। आपात स्थिति में लोगों को झोलाछाप चिकित्सकों के भरोसे रहना पड़ रहा है।

सुबह करीब 10 बजे सैकड़ों ग्रामीण और हिंदू सुरक्षा परिषद के कार्यकर्ता अस्पताल परिसर में एकत्र होकर प्रदर्शन करने लगे। दोपहर करीब 12:30 बजे प्रदर्शनकारियों ने रक्षपालपुर-अझुवा मार्ग पर जाम लगा दिया। सूचना पर पहुंचे थाना प्रभारी सत्यपाल सिंह ने धरने का नेतृत्व कर रहे विद्यार्थी प्रकोष्ठ के अंशु मिश्रा की एसडीएम खागा से वार्ता कराई, जिसके बाद जाम समाप्त कराया गया।

धरने की सूचना पर पहुंचे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धाता के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि पीएचसी में तैनात चिकित्सक का मई 2026 में स्थानांतरण हो चुका है। वहीं, केंद्र में तैनात फार्मासिस्ट अनिल कुमार ने दावा किया कि पिछले छह माह से यहां किसी भी चिकित्सक की तैनाती नहीं है। दोनों के बयानों में विरोधाभास सामने आने पर प्रदर्शनकारी भड़क उठे और नारेबाजी तेज कर दी।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अस्पताल पूरी तरह बदहाली का शिकार हो चुका है। परिसर में जंगली झाड़ियां उग आई हैं, चारों ओर गंदगी फैली है और दो माह से हैंडपंप खराब पड़ा है। सफाईकर्मी की भी तैनाती नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि अधीक्षक नियमित निरीक्षण का दावा करते हैं, फिर भी अस्पताल की दुर्दशा कई सवाल खड़े कर रही है।

गौराहार गांव की शांति देवी ने बताया कि वह पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थीं, लेकिन डॉक्टर के न मिलने पर उन्हें चार दिन बाद आने की सलाह देकर वापस भेज दिया गया।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिस चिकित्सक की तैनाती का दावा अधीक्षक कर रहे हैं, वह न तो अस्पताल कर्मियों को दिखाई दिया और न ही ग्रामीणों को। इससे लोगों में रोष और बढ़ गया। हिंदू सुरक्षा परिषद और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि दो दिन के भीतर चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

प्रदर्शन में हिंदू सुरक्षा परिषद के गौ रक्षा प्रांत अध्यक्ष आशीष शुक्ला, विद्यार्थी प्रकोष्ठ के अंशु मिश्रा, विष्णुकांत तिवारी, अमन सिंह, मनीष गोस्वामी, शिवम, संत सेवक, बिल्लू, सतबीर, लवलेश, अंकुर पाल सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

निरीक्षण के दावे पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक नियमित निरीक्षण का दावा करते हैं, लेकिन अस्पताल परिसर में फैली गंदगी, खराब हैंडपंप और झाड़ियों से पटी जमीन उनकी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। लोगों का आरोप है कि कागजों में व्यवस्थाएं दुरुस्त दिखाकर क्षेत्रवासियों को गुमराह किया जा रहा है।