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  • From Kilns to Climate: An initiative to include the voices of brick kiln workers in the climate dialogue.

भट्ठों से जलवायु तक: ईंट भट्ठा मजदूरों की आवाज़ को जलवायु संवाद में शामिल करने की पहल।

वाराणसी, ग्रामीण मीडिया संगठन चंबल मीडिया द्वारा बुनियाद पहल के तहत “तपते भट्ठे, बदलता मौसमः जमीनी कहानियाँ और जलवायु संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य ईंट भट्ठा मजदूरों और उनके परिवारों के जीवन, संघर्ष और अनुभवों को जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चर्चाओं के केंद्र में लाना है।

आयोजकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक असर उन समुदायों पर पड़ रहा है, जो खुले वातावरण में कठिन श्रम करते हैं। बढ़ती गर्मी, अनियमित बारिश, लंबे समय तक गर्म माहौल में काम, पलायन, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और सामाजिक सुरक्षा के अभाव जैसी समस्याएं ईंट भट्ठा मजदूरों के जीवन को लगातार प्रभावित कर रही हैं। इसके बावजूद इन मुद्दों को मुख्यधारा की जलवायु रिपोर्टिंग में पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता।

चंबल मीडिया, जो खबर लहरिया का मातृ संगठन है, ग्रामीण पत्रकारिता, डिजिटल समावेशन और समुदाय आधारित कहानी कहने की दिशा में काम करता है। वहीं बुनियाद पहल उत्तर प्रदेश के ईंट भट्ठा मजदूरों की कामकाजी और सामाजिक परिस्थितियों में सुधार के लिए समुदायों, सामाजिक संगठनों, शोधकर्ताओं और मीडिया के साथ मिलकर कार्य कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान ईंट भट्ठा मजदूरों और समुदायों के अनुभवों पर आधारित “चार्टर ऑफ डिमांड्स” भी प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें सुरक्षित कार्य परिस्थितियां, श्रम अधिकारों का पालन, स्वास्थ्य एवं शिक्षा तक पहुंच, प्रवासी मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा, पारदर्शी लाइसेंस व्यवस्था तथा पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने जैसी मांगें शामिल हैं।

इस पहल के तहत समुदाय आधारित कहानी कहने और मीडिया प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया है। उड़ान फेलोशिप के माध्यम से ईंट भट्ठा और अन्य हाशिये के समुदायों के 15 युवाओं को मोबाइल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग का प्रशिक्षण दिया गया। उनकी रिपोर्टों में जलवायु परिवर्तन को रोजमर्रा के जीवन, रोजगार, पलायन, जाति और जेंडर से जुड़े अनुभवों के रूप में सामने लाया गया है।

कार्यक्रम में “क्लाइमेट विजुअल मैप” भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें समुदायों की यादों, अनुभवों और पर्यावरणीय बदलावों को दर्ज किया गया है।

आयोजन के दौरान पत्रकारों, जलवायु विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, फेलोज़, ईंट भट्ठा मजदूरों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी से एक राउंडटेबल चर्चा भी आयोजित होगी। इसमें श्रम परिस्थितियों, पलायन, जलवायु संकट, आर्थिक स्थिरता तथा जाति और जेंडर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह सवाल उठाना है कि जलवायु परिवर्तन की कहानियां कौन बता रहा है और किन समुदायों की आवाजें अब भी पीछे छूट रही हैं।