चौकाघाट के प्राचीन सेतुबंध रामेश्वरम महादेव एवं उड़े हुए हनुमान मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार की अपील, अंतरगिरी मेला व विजय रथ की परंपरा सुरक्षित रखने पर जोर वाराणसी। काशी की प्राचीन धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर श्री रामजानकी हनुमान मंदिर ट्रस्ट, चौकाघाट के महंत एवं महामंत्री धर्मेश महाराज ने वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर रोड की प्रस्तावित योजना पर पुनर्विचार करने की मांग उठाई है। उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार से अपील की है कि विकास कार्यों के साथ प्राचीन मंदिरों, धार्मिक आयोजनों और स्थानीय परंपराओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए चौकाघाट स्थित श्री सेतुबंध रामेश्वरम महादेव मंदिर एवं श्री उड़े हुए हनुमान जी का मंदिर काशी की धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, वर्ष 1868 में श्री चित्रकूट रामलीला समिति की रामलीला के दौरान हनुमान जी के उड़ने की घटना का संबंध इस स्थान से बताया जाता है। ऐसे में प्रस्तावित कॉरिडोर के निर्माण से मंदिर परिसर की संरचनात्मक सुरक्षा और अस्तित्व को लेकर चिंता जताई गई है धर्मेश महाराज ने स्पष्ट किया कि मंदिर ट्रस्ट काशी के विकास का विरोधी नहीं है, बल्कि विकास और विरासत के संरक्षण के बीच संतुलन चाहता है। उन्होंने मांग की कि संबंधित विभागों, पुरातत्व विशेषज्ञों, अभियंताओं और स्थानीय प्रतिनिधियों की संयुक्त टीम से मंदिर परिसर का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। साथ ही, कॉरिडोर निर्माण से मंदिर की नींव, भवन, शिखर, मूर्तियों और आसपास की संरचनाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का तकनीकी अध्ययन कराया जाए उन्होंने निर्माण के दौरान कंपन, धूल, जलनिकासी और यातायात से जुड़े जोखिमों को रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय अपनाने, विशेषज्ञों की देखरेख में मंदिर का जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कराने और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक मार्ग या डिजाइन पर विचार करने की मांग की। मंदिर ट्रस्ट, स्थानीय निवासियों, श्रद्धालुओं और विशेषज्ञों से संवाद स्थापित कर उनके सुझावों को योजना में शामिल करने तथा निर्माण से पहले, दौरान और बाद में मंदिर की संरचनात्मक स्थिति कीनियमित निगरानी करने पर भी जोर दिया अंतरगिरी मेला और विजय रथ की परंपरा बचाने की अपील मंदिर परिसर में अगहन पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाला अंतरगिरी मेला काशी की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। इस आयोजन में लाखों की संख्या में माताएं और बहनें श्रद्धा के साथ शामिल होती हैं। इसके अलावा विजयदशमी पर भव्य धार्मिक आयोजन और रात लगभग 10 बजे निकलने वाला विजय रथ श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहता है। इन आयोजनों को काशी की लोकपरंपरा, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इनके संरक्षण की मांग की गई है धर्मेश महाराज ने बताया कि इस संबंध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और नगर आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों को पत्र एवं सूचना भेजकर अपनी चिंता से अवगत कराया गया है उन्होंने आग्रह किया कि मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता और धार्मिक आयोजनों को ध्यान में रखते हुए परियोजना के सभी संभावित विकल्पों का निष्पक्ष तकनीकी मूल्यांकन कराया जाए, ताकि विकास कार्यों के साथ काशी की प्राचीन धरोहर भी सुरक्षित रह सके।