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  • The contribution of patriot Rasbihari Bose in the freedom movement will always remain immortal: Ambrish Kumar Saxena

देशभक्त रासबिहारी बोस का योगदान आजादी के आंदोलन में सदैव अमर रहेगा:अम्बरीष कुमार सक्सेना

हरदोई,शिव सत्संग मण्डल के राष्ट्रीय समन्वयक अम्बरीष कुमार सक्सेना के अनुसार देशभक्त रासबिहारी बोस का योगदान आजादी के आंदोलन में सदैव अमर रहेगा। भारत की स्वतंत्रता के इतिहास में अनेक महान क्रांतिकारियों ने अपने साहस, त्याग और देशभक्ति से अमिट छाप छोड़ी। उन्हीं महान स्वतंत्रता सेनानियों में रास बिहारी बोस का नाम अत्यंत सम्मान और गर्व के साथ लिया जाता है। उनका जन्म 25 मई 1886 को पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले में हुआ था। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के ऐसे महानायक थे जिन्होंने देश को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।

रास बिहारी बोस बचपन से ही देशभक्त और साहसी स्वभाव के थे। उन्होंने अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों का विरोध किया और क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय भाग लिया। वर्ष 1912 में उन्होंने अंग्रेज वायसराय लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद अंग्रेज सरकार उनके पीछे पड़ गई, लेकिन वे बड़ी चतुराई से बच निकले।

बाद में रास बिहारी बोस जापान चले गए, जहाँ उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया। उन्होंने जापान में रहकर भारतीयों को संगठित किया तथा “इंडियन इंडिपेंडेंस लीग” की स्थापना की। आगे चलकर उन्होंने आज़ाद हिंद फौज की नींव रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बाद में इसी संगठन का नेतृत्व सुभाष चंद्र बोस ने संभाला और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।

रास बिहारी बोस केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी नेता भी थे। उन्होंने अपने विचारों और कार्यों से युवाओं में देशभक्ति की भावना जगाई। उनका जीवन हमें यह संदेश देता है कि मातृभूमि की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। अंग्रेज सरकार उनकी गतिविधियों से भयभीत रहती थी।

ब्रिटिश शासन की कठोर निगरानी से बचने के लिए रासबिहारी बोस जापान चले गए। वहाँ रहकर भी उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष जारी रखा। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने का प्रयास किया। जापान में उन्होंने भारतीयों को संगठित कर “इंडियन इंडिपेंडेंस लीग” की स्थापना की। बाद में उन्होंने आज़ाद हिंद फौज के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उसका नेतृत्व सुभाष चंद्र बोस को सौंप दिया।

रासबिहारी बोस केवल एक महान क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी नेता और कुशल संगठनकर्ता भी थे। उनका जीवन त्याग, साहस और देशभक्ति की प्रेरणा देता है। उन्होंने अपना पूरा जीवन भारत माता की सेवा में समर्पित कर दिया। आज उनकी जन्म जयंती पर हम उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का संकल्प करते हैं। युवाओं को उनके जीवन से देशप्रेम, साहस और समर्पण की सीख लेनी चाहिए। रासबिहारी बोस का योगदान भारतीय इतिहास में सदैव अमर रहेगा।