वाराणसी, केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान (CIHTS), सारनाथ, वाराणसी में "एक पौधा माँ के नाम" थीम पर एक विशेष "वृक्षारोपण महायज्ञ" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अपनी माताओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का एक बेहद अनूठा और भावनात्मक प्रयास है। कार्यक्रम का मुख्य विचार यह है कि जिस तरह एक माँ निस्वार्थ भाव से अपने बच्चे का पालन-पोषण करती है, उसी तरह हमें भी पृथ्वी और प्रकृति की देखभाल करनी चाहिए। लगाए गए हर पौधे को एक माँ की ममता की तरह ही सींचने और बड़ा करने का संकल्प लेना चाहिए।
तिब्बती बौद्ध परंपरा में प्रकृति, जीव-जंतुओं और पर्यावरण के प्रति गहरा आदर भाव सिखाया जाता है। संस्थान के कुलपति ने इस पुनीत अवसर पर जनसमूह को सम्बोधित करते हुए कहा कि "सारनाथ, जहाँ भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश दिया था, वैसे भी शांति और प्रकृति का केंद्र है। इस पावन भूमि पर पर्यावरण को हरा-भरा बनाने का यह संकल्प बौद्ध दर्शन के 'करुणा' और 'परस्पर निर्भरता' के सिद्धांत को भी दर्शाता है।" इस पुनीत महायज्ञ में संस्थान के कुलपति, प्रशासनिक अधिकारियों, प्राध्यापकों और छात्रों ने मिलकर परिसर में बड़े पैमाने पर औषधीय, छायादार और फलदार पौधे लगाए।
इस अवसर पर संस्थान की कुलसचिव डॉ सुनीता चन्द्रा ने संबोधित करते हुए कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण को शुद्ध ही नहीं करते, बल्कि भारतीय और बौद्ध संस्कृति में इन्हें जीवन और करुणा का प्रतीक माना गया है।उप-कुलसचिव डाॅ हिमांशु पाण्डेय ने कहा कि
"ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में वृक्षारोपण केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के प्रति एक गंभीर जिम्मेदारी है।"
कार्यक्रम का संचालन नोडलअधिकारी डाॅ.तेनजिंग शेनफेन ने किया । डॉ अनुराग त्रिपाठी, डॉ शुचिता शर्मा व संस्थान के अनेक प्रशासनिक अधिकारी व छात्रों ने प्रतिभाग किया ।