वाराणसी (चिरईगांव): सामाजिक न्याय के प्रणेता और भारतीय संविधान के शिल्पकार भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में चिरईगांव विकास खंड के ढाब क्षेत्र स्थित गोबरहा ग्राम सभा में रविवार को उत्सव जैसा माहौल रहा। ग्राम प्रधान चांदनी यादव के नेतृत्व में आयोजित इस भव्य समारोह में श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ बाबा साहब के तैल चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि धीरज यादव ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने आजादी के समय थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा और समानता के मार्ग पर चलकर ही हम एक सशक्त समाज का निर्माण कर सकते हैं। सांस्कृतिक संध्या: बिरहा की रही धूम
जयंती समारोह को खास बनाने के लिए गांव में विशाल 'बिरहा' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बिरहा जगत की प्रसिद्ध गायिका रीना साहनी और गायक शिवलोचन बागी के बीच हुई जवाबी कीर्तन और गायकी ने दर्शकों को रात भर बांधे रखा। कलाकारों ने अपनी गायकी के माध्यम से बाबा साहब के जीवन संघर्ष, दलितों-पिछड़ों के प्रति उनके योगदान और शिक्षा के महत्व को गीतों में पिरोकर प्रस्तुत किया। लोक कलाकार जंगली राम ने भी अपनी प्रस्तुति से माहौल को भक्तिमय और वैचारिक बनाया।
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने बाबा साहब को नमन किया। व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने और अतिथियों के स्वागत में कृपाल, गोविंद, वीरेंद्र, कर्मवीर, गोपाल और राजकुमार ने सक्रिय भूमिका निभाई। साथ ही चंद्रमा यादव सहित अन्य वरिष्ठ लोगों ने भी विचार साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में धीरज यादव ने सभी आगंतुकों और कलाकारों का आभार व्यक्त किया। ढाब क्षेत्र के इस सुदूर गांव में आयोजित इस गौरवशाली उत्सव ने न केवल बाबा साहब के प्रति सम्मान प्रकट किया, बल्कि सामाजिक सौहार्द की एक नई मिसाल भी पेश की। ग्रामीणों ने देर रात तक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया और बाबा साहब के बताए 'शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो' के संकल्प को दोहराया।