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  • Akanksha Srivastava directed Janani and Rhythm of Courage at the "Parampara 2026" Kathak Festival.

परम्परा 2026” कथक समारोह में आकांक्षा श्रीवास्तव के निर्देशन में हुई जननी और रिदम ऑफ करेज की जबरदस्त प्रस्तुति

लखनऊ 11 अप्रैल। पद्मजा कला संस्थान की सचिव एवं अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक नृत्यांगना एवं गुरु डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव द्वारा शनिवार 11 अप्रैल को आयोजित “परम्परा 2026 संगीत और नृत्य की एक शाम” का आयोजन कैसरबाग स्थित कला मण्डपम् प्रेक्षागृह में किया गया। इसमें उनके चार से पचास आयु तक के 80 से अधिक शिष्यों ने कथक नृत्य की विभिन्न प्रस्तुतियां दीं। मुख्य अतिथि के रूप में अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्यकार एवं शिक्षाविद् पद्मश्री विद्या बिंदु सिंह उपस्थित रहीं। संस्था के अध्यक्ष सुभाष चन्द्र श्रीवास्तव द्वारा अतिथियों का स्वागत अभिनंदन किया गया। इस क्रम में वरिष्ठ गायिका पद्मा गिडवानी, प्रतिष्ठित तबला वादक पंडित रविनाथ मिश्रा लोकप्रिय कथक कलाकार डॉ. मीरा दीक्षित एवं मंजुला पंत सहित वरिष्ठ कवयित्री ज्योति सिन्हा का सम्मान भी किया गया। 

सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रथम सोपान अत्यंत प्रेरक रचना “रिदम ऑफ करेज” रही। इसमें “लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती” पर आधारित अभिनय एवं कथक नृत्य की बेहतरीन प्रस्तुति दी गई। इसमें त्रिशिका, अन्वी, आरग्या, जीविका, मिंशिका, मायरा, कात्यायनी, शाव्या, वान्या, सान्वी, विशालाक्षी, अद्विका, स्वरा, अनाहिता, तनश्वी, नूशी, कामाख्या, स्वस्तिका, श्वेता, दीप्ती, आँचल, अंशिका, वाग्मी, संजना, अवन्तिका, इशिका, श्रेयसी एवं अनिकेत ने प्रतिभाग कर प्रशंसा हासिल की। डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव की “परिकल्पना, लेखन एवं निर्देशन में दूसरी प्रस्तुति कथक नृत्य नाटिका ‘‘जननी” रही। इसमें बृजेन्द्र नाथ श्रीवास्तव के संगीत निर्देशन में कलाकारों ने “एक वही शक्ति ऐसी माँ जो कहलाती है, ईश बनकर इस धरा पर सृष्टि को बचाती है” पर अत्यंत मनभावन नृत्य संयोजन पेश कर मां और बेटे के मार्मिक सम्बंध को पूर्ण दक्षता के साथ मंच पर साकार किया। इसमें तबले पर पंडित विकास मिश्रा ने साथ दिया जबकि नाट्य संवाद प्रियंका सिंह एवं आकांक्षा श्रीवास्तव ने उच्चारित किये। इसमें शैली मौर्या, खुशी मौर्या, प्रीति तिवारी, सिमरन कश्यप, अंशिका कटारिया, आरोहिणी चौधरी, सपना सिंह, विकास अवस्थी, अनेश रावत, अतुल माने, आदित्य गुप्ता के साथ स्वयं डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव ने अपने नृत्य हुनर का मनभावन प्रदर्शन कर तालियां अर्जित की।


तृतीय प्रस्तुति “लय स्पन्दन” रही। यह प्रस्तुति कथक के शुद्ध पक्ष को समर्पित रही। इस लय स्पंन्दन, पारम्परिक लय-गति और अंग-विन्यास से सुसज्जित नृत्य संरचना में तीनताल - 16 मात्राओं पर आधारित उपज, ठाठ, उठान, आमद के प्रकार, दुर्गा परन आदि का प्रदर्शन किया गया। इसके उपरान्त लय की बढ़त के साथ टुकड़े, परन, फरमाइशी एवं जुगलबन्दी ने कथक के सौन्दर्य एवं चपलता को सुन्दरता एवं आकर्षण के साथ दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया। इसमें श्रेया अग्रहरी, अनामिका, स्वधा, पर्णिका, सताक्षी, रितिका, मोनिका, आकांक्षा वर्मा, तश्मीन, अदिति, रिया, कृति, श्वेता, रिदम, देवस्मिता, आयुषी, समृद्धि, रचना, नीतू, इशानी, दीपा, पूजा, नायरा, उन्नयन, अहाना, वारिधि, आकृति, पाखी, सौम्या, मांडवी, शुभांगी, प्रतिष्ठा, श्रीदेवी, अनिका, निखिल एवं प्रियांशु ने लय और ताल के सौन्दर्य को प्रभावी रूप से पेश किया। इसमें दिनकर द्विवेदी ने गायन पंडित विकास मिश्रा ने तबला वादन, डॉ. नवीन मिश्रा ने सितार वादन, डॉ. शिखा शर्मा ने मोहन वीणा और डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव ने पढ़ंत का दायित्व बखूबी निभाया। समारोह में प्रकाश संचालन मनीष सैनी का रहा जबकि कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ एंकर डॉ. अलका निवेदन ने किया। अंत में आयोजन के प्रतिभागियों और सहयोगियों को भी अलंकृत किया गया। खचाखच भरे ऑडिटोरियम में उपस्थित कला रसिकों ने अंत तक इस नयनाभिराम समारोह का भरपूर आनंद लिया।