राजधानी लखनऊ के थाना मड़ियांव क्षेत्र में 26 जून 2026 को हुए कथित जानलेवा हमले के मामले में पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि घटना के 48 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस ने न तो एफआईआर दर्ज की है और न ही किसी आरोपी के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की है। पीड़ित परिवार का कहना है कि सभी नामजद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं और परिवार लगातार भय के माहौल में जीवन व्यतीत कर रहा है।
पीड़ित बसंत लोधी के अनुसार, उनके छोटे भाई छोटेलाल उर्फ बाबा पर रहीमनगर डूडौली पानी टंकी के पास लिंटर डालने के कार्य के दौरान कथित रूप से पुतानी वर्मा, उसके लड़के, नक्षत्र त्रिपाठी तथा अन्य लोगों ने जानलेवा हमला किया। हमले में छोटेलाल के सिर एवं शरीर पर गंभीर चोटें आईं और उन्हें बेहोशी की हालत में मेडिकल कॉलेज (केजीएमयू) में भर्ती कराया गया, जहाँ उनका उपचार जारी है। परिवार का कहना है कि उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है।
पीड़ित पक्ष का यह भी आरोप है कि इसी घटना के दौरान सूरज शुक्ला के साथ मारपीट की गई तथा उनका मोबाइल फोन और लगभग ₹30,000 नकद भी छीन लिया गया। उनका दावा है कि घटना के वीडियो उपलब्ध हैं, जिनमें कथित आरोपियों के चेहरे स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं, फिर भी अब तक किसी भी आरोपी के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
बसंत लोधी एवं सूरज शुक्ला का कहना है कि उन्हें तथा उनके परिवार को आज भी जान का खतरा बना हुआ है। उनका आरोप है कि आरोपी लगातार दबाव और भय का माहौल बना रहे हैं, जिसके कारण परिवार के लोग घर से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस की निष्क्रियता से अपराधियों का मनोबल बढ़ा है।
पीड़ित परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त लखनऊ तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए, सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, जानलेवा हमला, लूट एवं अन्य लागू धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए तथा पीड़ित परिवार को तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
पीड़ित पक्ष ने कहा कि यदि समय रहते निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो कानून व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर होगा। उन्होंने शासन एवं प्रशासन से आग्रह किया है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और आम नागरिकों का कानून पर विश्वास बना रहे।