भारत विकास परिषद् काशी प्रदेश प्रान्त उत्तर मध्य क्षेत्र-द्वितीय के नीलकण्ठ शाखा द्वारा महापुरुष जयन्ती के क्रम में महान क्रान्तिकारी, राष्ट्रवादी नेता, ओजस्वी वक्ता, स्वदेशी और समरसता के लिए आन्दोलन करने वाले स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर राव सावरकर जी के जयन्ती पर पर्यावरण संरक्षण हेतु यज्ञ के साथ मनाया ।
यह कार्यक्रम आर्य समाज भोजूवीर वाराणसी हुआ । शाखाध्यक्ष रवि प्रकाश बरनवाल ने सभी का स्वागत किया । सुनिल जायसवाल ने कहा कि ब्रिटिश सरकार की जड़ें खोदने के लिए सावरकर जी को दो बार काला पानी की सजा हुई थी । चन्द्रदीप आर्य (मंत्री जिला आर्य प्रतिनिधि सभा वाराणसी) ने कहा कि वीर सावरकर जी ऐसे पहले बैरिस्टर थें जो कि 1909 में ब्रिटेन में ग्रेज-इन परीक्षा पास करने के बाद ब्रिटेन के राजा के प्रति वफादार रहने का शपथ नहीं ली, इसी के कारण उन्हें कभी भी बैरिस्टर होने का प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ । प्रमोद आर्य ‘आर्षेय’ (उपाध्यक्ष जिला आर्य प्रतिनिधि सभा वाराणसी) ने अपने वक्तव्य में बताया कि ये एक ऐसे क्रान्तिकारी थें कि जिनको अंग्रेजी सरकार ने जब दो आजन्म कारावास की सजा सुनाई तो इन्होंने हंसते हुए कहा कि चलो ईसाई सत्ता ने हिन्दू धर्म के पुनर्जन्म सिद्धान्त को मान तो लिया ।
वेद प्रकाश आर्य ने कहा कि जैसे शिवाजी महाराज जी ने औरंगजेब के कैद से मुक्त होने के लिए अनेक पत्र लिखें, उसी प्रकार मातृभूमि की सेवा के लिए इन्होंने साम, दाम, दंड और भेद की वही नीति अपनाई जो वीर शिवाजी महाराज जी ने औरंगज़ेब की कैद में अपनाईं थीं । इन्होंने अंग्रेजों से क्षमा मांग कर मातृभूमि जाने का प्रस्ताव उनके समक्ष रखा । अंग्रेज उनकी कूटनीति का शिकार बन गए और इन्हें सशर्त रिहा कर दिया गया । रवि प्रकाश बरनवाल ने कहा कि पूजा पद्धति पर सावरकर जी नास्तिक थें । वे गाय को मात्र एक उपोयोगी पशु कहतें थें । लेकिन हिन्दूओं के लिए कार्य करने व हिन्दू राष्ट्रवाद जगाने व हिन्दुओं के उत्थान के लिए सदैव अग्रसर रहें । ये सामाजिक उत्थान एवं दलितों को मंदिरों में प्रवेश के प्रबल समर्थक रहें ।