महारानी दुर्गावती के योगदान को किया गया याद, लोकनृत्यों ने बांधा समां

वाराणसी, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश, लखनऊ के सहयोग से तथा निर्मल जनकल्याण एवं सांस्कृतिक समिति, लखनऊ एवं जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में जनजाति उत्सव के अंतर्गत “गोंडवाना शौर्य महोत्सव” का आयोजन बुधवार को गोंड वीरांगना महारानी दुर्गावती स्मृति भवन न्यास परिसर, ग्रामसभा चक्का, विकास खंड हरहुआ में किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आनंद द्विवेदी, निदेशक, जन शिक्षण संस्थान निदेशालय वाराणसी, विशिष्ट अतिथि कपिल नारायण पाण्डेय, काशी प्रबुद्ध प्रकोष्ठ, ग्राम प्रधान मधुबन यादव, निर्मल समिति की अध्यक्ष निर्मला शर्मा, जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान के सचिव डॉ. बृजभान मरावी तथा स्मृति भवन न्यास के अध्यक्ष दिनेश कुमार गोंड द्वारा महारानी दुर्गावती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।

मुख्य अतिथि आनंद द्विवेदी ने कहा कि गोंड वीरांगना महारानी दुर्गावती का मध्यकालीन भारत के इतिहास में महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास, वीरता, संस्कृति, परंपराओं एवं महान विभूतियों के योगदान को जन-जन तक पहुंचाना तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देना है।

महोत्सव में जनजातीय कला, संस्कृति एवं लोक परंपराओं पर आधारित विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। विनोद कुमार द्वारा वाराणसी के गोंड आदिवासियों का प्रसिद्ध गोंडी नृत्य प्रस्तुत किया गया। वहीं पवन खरवार (सोनभद्र) ने आदिवासी करमा नृत्य तथा मोहन कुमार ने शैला नृत्य-गीत प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की। कार्यक्रम में प्रियंका गोंड द्वारा प्रस्तुत एकल नृत्य ने भी सभी का मन मोह लिया।

महोत्सव के माध्यम से जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककलाओं और शौर्य गाथाओं को प्रभावी रूप से मंच प्रदान किया गया।