राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने दिया सहयोग का पूरा आश्वासन
लखनऊ। समाज कल्याण एवं जनजाति विकास विभाग के राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में कार्यरत संविदा शिक्षकों ने आज राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष जे एन तिवारी की अध्यक्षता में संयुक्त परिषद के कार्यालय में एक आवश्यक बैठक किया। बैठक का संचालन राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की महामंत्री अरुण शुक्ला ने किया।
सभी मंडलों के राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों से उपस्थित श8क्षकों ने खुले मन से अपने विचार रखें ।उन्होंने अवगत कराया कि उनकी नियुक्ति 2008 में हुई थी लेकिन लगभग 16-17 वर्ष की सेवा पूरी करने के बावजूद भी उनका नियमितीकरण नहीं हो रहा है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय बार-बार लंबे समय से कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने की बात कर रहा है।
समाज कल्याण एवं जनजाति विकास विभाग में कार्यरत सभी संविदा शिक्षक सृजित पदों को विज्ञापन के माध्यम से भरने के लिए नियमानुसार गठित चयन समिति के माध्यम से चयनित होकर कार्य कर रहे हैं। इन शिक्षकों के पास शिक्षक पद के लिए अनिवार्य योग्यता एवं अधिमानी योग्यता भी है।
विभाग के संविदा शिक्षकों को उनके पद का वेतनमान, न्यूनतम ग्रेड वेतन एवं सरकार द्वारा समय-समय पर सरकारी कर्मचारियों को देय महंगाई भत्ते की सुविधा मिल रही है। ऐसे शिक्षकों को नियमित करने पर सरकार पर कोई व्यय भार नहीं पड़ने वाला है। शिक्षकों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए अवगत कराया कि नवीनीकरण में विभागीय अधिकारी मनमानी करते हैं । 60% परीक्षा परिणाम एवं प्रत्येक छात्र द्वारा 60% अंक अर्जित न किए जाने पर संबंधित विषय के शिक्षक को नौकरी से बाहर कर दिया जा रहा है। जनजाति विकास विभाग में ऐसे 9 से अधिक शिक्षक हैं, जो विभाग की तानाशाही नीति के शिकार है।
उपस्थित शिक्षकों ने अपनी एकजुटता का परिचय देते हुए राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद से जुड़ते हुए अपनी समस्याओं के निराकरण का अनुरोध किया। संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने शिक्षकों को आश्वस्त किया कि उनका प्रकरण मुख्यमंत्री के स्तर पर उठाया जाएगा तथा उसका समाधान कराया जाएगा।
सभी छात्र सभी विषयों में 60% अंक हासिल करें, यह व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है और ना किसी भी बोर्ड परीक्षा में इस तरह का नियम है ।इस तरह का तुगलकी आदेश सिर्फ जनजाति विकास में ही चलाया जा रहा है। इसका भी पूरा विरोध किया जाएगा।
उन्होंने शिक्षकों को स्पष्ट किया कि राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद विनियमितिकरण नियमावली 2026 निर्गत कराने के लिए प्रयास कर रही है। विनियमितिकरण नियमावली 2026 से समाज कल्याण विभाग के सभी संविदा शिक्षकों एवं फार्मासिस्टों आच्छादित कराया जाएगा।
नवीनीकरण में हो रही मनमानी के खिलाफ भी संयुक्त परिषद मुख्यमंत्री तक पीड़ित शिक्षकों की आवाज पहुंचाएगी। चुनावी वर्ष में जनजाति विकास विभाग के अधिकारी जानबूझकर शिक्षकों को नौकरी से निकालने का काम कर रहे हैं, ताकि जनता में सरकार की गुड गवर्नेंस छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।