सनातन, संस्कृति, सेवा, शिक्षा एवं राष्ट्र निर्माण का हमारा संकल्प

राष्ट्रीय युवा वाहिनी एवं राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, सेवा, शिक्षा, सामाजिक समरसता एवं जनकल्याण के कार्यों को बढ़ावा देना है। हमारा विश्वास है कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके संस्कारवान नागरिक, श्रेष्ठ शिक्षा, चरित्रवान युवा और जागरूक समाज में निहित होती है।

हम किसी भी राजनीतिक दल के अधीन कार्य करने का दावा नहीं करते। प्रत्येक राजनीतिक दल का अपना कार्यक्षेत्र और उद्देश्य होता है। हमारा कार्यक्षेत्र सेवा, संस्कार, शिक्षा, सनातन संस्कृति, जनजागरण और चरित्र निर्माण है।

हमारा ध्येय सेवा • संस्कार • शिक्षा • सनातन • सुरक्षा

हमारा संकल्प

"राष्ट्र प्रथम — संस्कृति सर्वोपरि"

हम केवल बातें करने में विश्वास नहीं रखते, बल्कि धरातल पर कार्य करने में विश्वास रखते हैं। हमारा लक्ष्य समाज को जोड़ना, संस्कारित करना और सेवा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है।

हमारा राष्ट्रीय संकल्प

हमारा उद्देश्य भारत के विभिन्न क्षेत्रों में 501 गुरुकुलों की स्थापना एवं संचालन के लिए समाज को प्रेरित करना है, जहाँ भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संतुलित समन्वय हो। हम ऐसी शिक्षा व्यवस्था की कल्पना करते हैं जिसमें विद्यार्थियों को आधुनिक विषयों के साथ—

- भारतीय संस्कृति- नैतिक शिक्षा- संस्कृत भाषा- योग एवं ध्यान - पर्यावरण संरक्षण- विज्ञान एवं तकनीक- आत्मनिर्भरता- नेतृत्व क्षमता- सामाजिक उत्तरदायित्व का समग्र ज्ञान प्राप्त हो।

सनातन क्या है?

"सनातन" का अर्थ है—जो शाश्वत है, जिसका न आदि है और न अंत।

सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि सत्य, करुणा, सेवा, न्याय, आत्मसंयम, कर्तव्य, प्रकृति के सम्मान और समस्त मानवता के कल्याण पर आधारित जीवन-दर्शन है।

सनातन हमें सिखाता है—- सत्य बोलो।

- धर्म का पालन करो। - माता-पिता एवं गुरु का सम्मान करो। - राष्ट्र को सर्वोपरि मानो। - सभी प्राणियों के प्रति दया रखो। - सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाओ। - "वसुधैव कुटुम्बकम्" की भावना अपनाओ। - "सर्वे भवन्तु सुखिनः" का संकल्प लो।

गीता का संदेश श्रीमद्भगवद्गीता निष्काम कर्म, आत्मविश्वास, धैर्य, अनुशासन, आत्मसंयम और कर्तव्यपालन का संदेश देती है। यह हमें सिखाती है कि बिना किसी स्वार्थ के समाज और राष्ट्र के हित में कार्य करना ही श्रेष्ठ कर्म है। गायत्री मंत्र का संदेश

गायत्री मंत्र ज्ञान, विवेक और आत्मिक प्रकाश का प्रतीक है। इसका भाव है कि हमारी बुद्धि सदैव सत्य, ज्ञान, सदाचार और लोककल्याण के मार्ग पर प्रेरित रहे।

गुरुकुल क्या है? गुरुकुल भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था का स्वरूप था, जहाँ शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहती थी। वहाँ गुरु के सान्निध्य में विद्यार्थी जीवन जीने की कला, अनुशासन, आत्मनिर्भरता, सेवा, संस्कृति और चरित्र निर्माण का अभ्यास करते थे।

गुरुकुल का उद्देश्य केवल विद्वान बनाना नहीं, बल्कि श्रेष्ठ नागरिक और श्रेष्ठ मानव बनाना था।

गुरुकुल पद्धति क्या है?

गुरुकुल पद्धति ऐसी शिक्षा व्यवस्था है जिसमें—

- शिक्षा- संस्कार- अनुशासन- योग- आयुर्वेद- भारतीय संस्कृति- विज्ञान- आत्मनिर्भरता- राष्ट्रभक्ति - सेवा

का संतुलित विकास किया जाता है।

आधुनिक गुरुकुल की हमारी परिकल्पना हम ऐसे आधुनिक गुरुकुल स्थापित करने का संकल्प लेते हैं जहाँ आधुनिक विद्यालयी शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय हो।

इन गुरुकुलों में विद्यार्थियों को आधुनिक पाठ्यक्रम के साथ—

- संस्कृत भाषा एवं सरल अनुवाद- योग एवं ध्यान- भारतीय दर्शन- नैतिक शिक्षा- व्यक्तित्व विकास- डिजिटल शिक्षा- वैज्ञानिक दृष्टिकोण- पर्यावरण संरक्षण- सामाजिक नेतृत्व

का प्रशिक्षण देने का प्रयास किया जाएगा। शिक्षा से संस्कार — संस्कार से राष्ट्र निर्माण केवल डिग्री प्राप्त करना शिक्षा का उद्देश्य नहीं है। वास्तविक शिक्षा वही है जो मनुष्य को—

- विनम्र- अनुशासित- सत्यनिष्ठ- कर्तव्यनिष्ठ- आत्मनिर्भर- समाजोपयोगी बनाए।

जब शिक्षा के साथ संस्कार जुड़ते हैं, तभी सशक्त परिवार, सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है। हमारे सेवा कार्य — एक दृष्टि

हमारे संगठन द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में सेवा कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—

- 54 अनाथ आश्रम संचालित- 52 गौशालाएँ संचालित - 32 गुरुकुल संचालित- 57 नए गुरुकुलों पर कार्य प्रारम्भ

- 501 से अधिक संस्कार शालाएँ- 587 संस्कार केंद्र

के माध्यम से शिक्षा, संस्कार और सेवा का कार्य आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।-

अनाथ आश्रम हमारे आश्रमों में असहाय बच्चों को भोजन, वस्त्र, शिक्षा, चिकित्सा तथा संस्कारयुक्त वातावरण उपलब्ध कराने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाता है।

गौ सेवा

हमारी गौशालाओं में गौमाताओं के संरक्षण, चारा, चिकित्सा और देखभाल की व्यवस्था करने का प्रयास किया जाता है।

गुरुकुल हमारे गुरुकुलों में वैदिक अध्ययन, संस्कृत, योग, भारतीय संस्कृति, नैतिक शिक्षा, संगीत तथा आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर बल दिया जाता है। संस्कार शाला

संस्कार शालाओं और संस्कार केंद्रों के माध्यम से बच्चों और युवाओं में—

- नैतिकता

- अनुशासन

- राष्ट्रभक्ति

- सेवा भावना

- भारतीय संस्कृति

- सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्यों का विकास करने का प्रयास किया जाता है।