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भक्ति और आस्था से सजी रासलीला, चैतन्य महाप्रभु एवं श्री राम महोत्सव की लीलाएं

रासलीला में छलका कृष्ण प्रेम, राम महोत्सव में गूंजा प्रभु श्रीराम का जयघोष*

*मंडल प्रभारी अवनीत कुमार शर्मा*

रामपुर। धर्म और भक्ति की नगरी रामपुर में इन दिनों धार्मिक आयोजनों की छटा देखते ही बन रही है। सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालु भगवान की विभिन्न लीलाओं के दर्शन कर आध्यात्मिक आनंद में सराबोर हो रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार की सुबह श्री रासलीला एवं चैतन्य महाप्रभु की लीला के साथ चोर उद्धार लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। वहीं रात्रि में आयोजित श्री राम महोत्सव में स्वायंभुव मनु की तपस्या, रावण जन्म, रावण दिग्विजय, कौशल्या हरण और दशरथ विवाह की लीलाओं का मनोहारी मंचन हुआ सुबह लीला मंचन के दौरान जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला का प्रसंग सामने आया, वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रीकृष्ण और गोपियों के प्रेम एवं भक्ति से जुड़े प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को जीवंत कर दिया। मंच पर सजे मनोहारी दृश्य और भक्ति संगीत के बीच श्रद्धालु देर तक भगवान की लीला में डूबे रहे इसके बाद चैतन्य महाप्रभु की लीला का मंचन किया गया। भक्ति, प्रेम और भगवान के नाम-स्मरण का संदेश देने वाली इस लीला ने श्रद्धालुओं को भक्ति मार्ग की ओर प्रेरित किया। वहीं चोर उद्धार लीला में भगवान की करुणा और शरण में आने वाले जीव के उद्धार का भावपूर्ण संदेश प्रस्तुत किया गया। लीला के दौरान कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को बांधे रखा रात्रि में आयोजित श्री राम महोत्सव में मंच पर जैसे ही त्रेता युग के प्रसंग जीवंत हुए, पूरा वातावरण ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा। सबसे पहले स्वायंभुव मनु की तपस्या का मंचन किया गया। इसमें मनु द्वारा भगवान की प्राप्ति के लिए की गई कठोर तपस्या और प्रभु के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया इसके बाद रावण जन्म का प्रसंग मंचित हुआ। रावण के जन्म और उसके असाधारण व्यक्तित्व से जुड़े प्रसंगों को कलाकारों ने अभिनय के माध्यम से जीवंत किया। आगे रावण दिग्विजय की लीला में उसके बढ़ते अहंकार, शक्ति प्रदर्शन और विभिन्न दिशाओं पर विजय प्राप्त करने की महत्वाकांक्षा को दर्शाया गया। मंच पर रावण के प्रभावशाली रूप ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया इसके बाद कौशल्या हरण का प्रसंग प्रस्तुत किया गया, जिसमें कथा के नाटकीय घटनाक्रम ने दर्शकों को रोमांचित किया। कलाकारों के संवाद, अभिनय और मंच सज्जा ने पूरे प्रसंग को प्रभावशाली बना दिया अंत में दशरथ विवाह की लीला का सुंदर मंचन हुआ। विवाह प्रसंग के दौरान मंच पर उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया। मंगलगीत, संवाद और पात्रों के भावपूर्ण अभिनय से श्रद्धालु भक्ति एवं आनंद में डूब गए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दिलीप सक्सेना, संदीप अग्रवाल सोनी एवं शुभम सिंघल मौजूद रहे। अतिथियों ने धार्मिक लीलाओं का आनंद लिया और आयोजकों द्वारा किए जा रहे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। लीला के प्रत्येक प्रसंग के साथ वातावरण भक्तिमय होता रहा और भगवान के जयकारों से आयोजन स्थल गूंजता रहा। राम, कृष्ण और चैतन्य महाप्रभु की लीलाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, प्रेम, त्याग और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश मिला। इस अवसर पर अध्यक्ष सुनील कुमार गोयल सोनी ताऊ,सह-अध्यक्ष हरिश्चंद्र अग्रवाल, महामंत्री वीरेंद्र कुमार गर्ग, कोषाध्यक्ष निर्भय गर्ग, ईश्वर शरण अग्रवाल, योगेश अरोड़ा, डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. सुमित गोयल, मनोज अग्रवाल, अरविंद कुमार अग्रवाल अरुण कुमार अग्रवाल, राजीव शरण गर्ग, ज्ञान प्रकाश गुप्ता, आकाश बंसल, शांति शरण राठौर, संजय कुमार अग्रवाल, हरिओम गुप्ता, रविंद्र कुमार मिश्रा सहित कमेटी के सभी सदस्य मौजूद रहे।