बिजली चोरी करने वालों पर कार्रवाई के लिए जेईआरसी से मंजूरी देने की मांग

जेकेईईजीए ने कहा—क्षेत्रीय अधिकारियों को अधिकार मिलने से बिजली चोरी पर लगेगा अंकुश

जम्मू। जम्मू-कश्मीर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स एसोसिएशन (जेकेईईजीए) की कार्यकारिणी की बैठक अध्यक्ष इंजीनियर सचिन टिक्कू की अध्यक्षता में हुई। बैठक में जम्मू पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेपीडीसीएल) प्रबंधन और कर्मचारी यूनियनों के बीच 14 अगस्त 2026 को हुए समझौते में तय बिंदुओं की समीक्षा की गई बैठक में जेकेईईजीए ने संयुक्त विद्युत नियामक आयोग (जेईआरसी) से मांग की कि जेपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक द्वारा क्षेत्रीय अधिकारियों को बिजली चोरी और अवैध रूप से बिजली का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए मांगी गई मंजूरी को शीघ्र प्रदान किया जाए एसोसिएशन के अनुसार, समझौते में विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135(1ए) और धारा 151 के तहत बिजली चोरी के मामलों में शिकायत दर्ज कराने तथा आवश्यक कार्रवाई के लिए जेपीडीसीएल के अधिकृत अधिकारियों को अधिकार देने पर सहमति बनी थी। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा चार सप्ताह के भीतर संबंधित अधिकारियों को अधिकृत किया जाना था।

जेकेईईजीए ने बताया कि निर्धारित अवधि के बाद जेपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक ने 11 सितंबर 2026 को जेईआरसी के अध्यक्ष को पत्र भेजकर ऐसे अधिकारियों को अधिकृत करने की मंजूरी मांगी थी, जो अवैध बिजली उपयोग करने वालों के कनेक्शन काटने सहित कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई कर सकें। एसोसिएशन का आरोप है कि इस संबंध में अभी तक जेईआरसी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है एसोसिएशन ने कहा कि बिजली चोरी, एटी एंड सी लॉस तथा कम राजस्व वसूली जैसी समस्याओं का सीधा असर जेपीडीसीएल की वित्तीय स्थिति पर पड़ता है और इन परिस्थितियों में फील्ड कर्मचारियों को भी आलोचना का सामना करना पड़ता है। इसलिए कानून के तहत प्रभावी प्रवर्तन व्यवस्था स्थापित करना आवश्यक है बैठक में खराब एवं नॉन-कम्यूनिकेटिंग स्मार्ट मीटरों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। समझौते के तहत क्षतिग्रस्त मीटरों को बदलने के लिए व्यापक एसओपी तैयार करने पर सहमति बनी थी। जेकेईईजीए के अनुसार, करीब 25,000 स्मार्ट मीटर क्षतिग्रस्त या नॉन-कम्यूनिकेटिंग स्थिति में हैं। इस संबंध में समिति के गठन के बावजूद अभी तक एसओपी जारी नहीं की गई है और वर्ष 2024-25 से क्षतिग्रस्त पड़े कई मीटरों को बदला नहीं जा सका है इसी प्रकार, क्षतिग्रस्त एवं नॉन-कम्यूनिकेटिंग मीटरों की जेईआरसी के नियमों के अनुसार बिलिंग को लेकर भी एसोसिएशन ने चिंता जताई। जेपीडीसीएल प्रबंधन द्वारा 24 अगस्त 2026 को इस मामले को जेईआरसी के समक्ष उठाया गया था, लेकिन जेकेईईजीए के अनुसार एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। एसोसिएशन ने कहा कि इस मुद्दे का सीधा संबंध उपभोक्ताओं की बिलिंग और जेपीडीसीएल की वित्तीय स्थिति से है बैठक में स्मार्ट मीटरों की खराब गुणवत्ता, नॉन-कम्यूनिकेशन, जलने तथा समय पर प्रतिस्थापन नहीं होने से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। एसोसिएशन ने कहा कि समझौते के अनुसार खराब कार्य, देरी और अन्य कमियों के लिए संबंधित एजेंसियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी थी, लेकिन अभी तक ऐसी कार्रवाई स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है जेकेईईजीए ने यह भी कहा कि बिजली चोरी और अवैध बिजली उपयोग के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और पूर्ण प्रवर्तन तंत्र आवश्यक है। एसोसिएशन के अनुसार, स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में फील्ड स्तर के अधिकारी और कर्मचारी कानून के प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई करने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं अंत में जेकेईईजीए ने जेईआरसी के अध्यक्ष से आग्रह किया कि जेपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक द्वारा 11 सितंबर 2026 और 24 अगस्त 2026 को भेजे गए पत्रों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए, ताकि बिजली चोरी के मामलों में कानून के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके और ईमानदार उपभोक्ताओं को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।