जब शहर से उब जाना तब मेरे गांव आना - टीका राम शर्मा,

 वाराणसी बहिष्कार’ आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी अपने समय में थी। आधुनिक समाज में भले ही परिस्थितियाँ बदल गई हों, लेकिन सामाजिक भेदभाव, मानसिक संकीर्णता और समूहवादी सोच आज भी विभिन्न रूपों में मौजूद है। इस दृष्टि से यह कहानी वर्तमान समय के लिए भी एक महत्वपूर्ण सामाजिक दस्तावेज बन जाती है। उक्त कथन मनोहर लाल द्वारा प्रेमचंद की जन्मभूमि लमही प्रेमचंद की कहानी बहिष्कार का पाठन अखलाक खान भारतीय ने

वाराणसी के लमही स्थित प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट द्वारा आयोजित साप्ताहिक साहित्यिक कार्यक्रम “सुनो मैं प्रेमचंद” के 1952वा दिवस  संपन्न हुआ। कार्यक्रम में अजय यादव, अतुल यादव, रामजतन पाल, सुशीला यादव, मनोहर‌लाल, स्थानीय साहित्यप्रेमियों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक साहित्यप्रेमी, और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।  कार्यक्रम का संचालन आयुषी दूबे ने किया, सभी का स्वागत मनोज विश्वकर्मा व धन्यवाद ज्ञापन  राजीव गोंड ने किया।