🇮🇳🚩 राष्ट्रीय अध्यक्ष का विशेष ऐतिहासिक एवं वैचारिक वक्तव्य 🚩🇮🇳
“भारत में सार्वजनिक स्थानों के नाम: इतिहास, स्मृति और पुनर्विचार का प्रश्न”
हिन्दू देव प्रकाश शुक्ला जी
राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय युवा वाहिनी एवं राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर भाजपा
आज एक सवाल बार-बार उठता है—
> “भारत में मुस्लिम शासकों, नेताओं और ऐतिहासिक व्यक्तियों से जुड़े नामों पर एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, सड़कें, मोहल्ले और अन्य सार्वजनिक स्थान क्यों हैं? क्या यह सब कांग्रेस की देन है इस प्रश्न का उत्तर भावनाओं से नहीं, तथ्यों और इतिहास की पूरी पृष्ठभूमि के साथ देना आवश्यक है सबसे पहले एक बात स्पष्ट कर देना जरूरी है—भारत में मुस्लिम नाम वाले हर स्थान को एक ही श्रेणी में रखना सही नहीं होगा। कुछ नाम मध्यकालीन शासकों से जुड़े हैं, कुछ सूफी संतों या धार्मिक व्यक्तित्वों से, कुछ आधुनिक भारतीय नेताओं से और कुछ केवल ऐतिहासिक स्थानीय नाम हैं इसलिए हमें व्यक्ति और उसके ऐतिहासिक योगदान को देखकर बात करनी चाहिए।
1. 🇮🇳 क्या भारत में मुस्लिम व्यक्तियों/ऐतिहासिक नामों से जुड़े सार्वजनिक स्थान आज भी हैं?
हाँ, ऐसे उदाहरण मौजूद हैं।
दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन आज भी भारतीय रेलवे का महत्वपूर्ण स्टेशन है। भारत सरकार की 2026 की रेलवे संबंधी सूची में भी Hazrat Nizamuddin स्टेशन दर्ज है।
दिल्ली में अनेक ऐतिहासिक मार्गों के नाम भी मध्यकालीन शासकों से जुड़े रहे हैं। NDMC के दस्तावेजों में बाबर रोड, शाहजहाँ रोड, अकबर रोड और तुगलक रोड जैसे नामों से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।
इसलिए यह कहना कि ऐसे नाम भारत में हैं ही नहीं—गलत होगा।
लेकिन अगला सवाल इससे भी महत्वपूर्ण है—
ये नाम किस उद्देश्य से रखे गए और क्या आज इनकी समीक्षा होनी चाहिए?
2. 🏛️ क्या यह सब केवल कांग्रेस की देन है?
यहाँ इतिहास को थोड़ा अधिक सावधानी से देखना होगा।
कांग्रेस की विभिन्न सरकारों के समय भारत में अनेक सार्वजनिक संस्थानों और स्थानों के नामकरण हुए हैं, लेकिन यह कहना कि भारत में मौजूद प्रत्येक मुस्लिम-संबंधित नाम केवल कांग्रेस ने रखा था, ऐतिहासिक रूप से सही नहीं होगा।
कई नाम औपनिवेशिक काल, उससे भी पहले की ऐतिहासिक परंपराओं या स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था से चले आए।
इसके अलावा नामकरण और पुनर्नामकरण अलग-अलग समय में अलग-अलग सरकारों तथा स्थानीय निकायों द्वारा किए गए हैं।
उदाहरण के लिए NDMC के आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि:
Aurangzeb Road → Dr. A.P.J. Abdul Kalam Road — 2015
Race Course Road → Lok Kalyan Marg — 2016
Dalhousie Road → Dara Shikoh Road — 2017
जैसे बदलाव हुए।
इसलिए इतिहास को केवल यह कहकर समाप्त नहीं किया जा सकता कि “यह सब कांग्रेस ने किया।”
3. 🚩 लेकिन क्या कांग्रेस के समय नामकरण की राजनीति पर सवाल नहीं उठने चाहिए?
बिल्कुल उठने चाहिए।
किसी भी सरकार के निर्णयों की समीक्षा लोकतंत्र में संभव है।
यदि किसी काल में सार्वजनिक स्थानों के नामकरण में कुछ व्यक्तियों को बहुत अधिक महत्व दिया गया और अन्य भारतीय नायकों, स्वतंत्रता सेनानियों, वैज्ञानिकों, समाज-सुधारकों या सांस्कृतिक व्यक्तित्वों को अपेक्षाकृत कम स्थान मिला, तो उस नीति पर चर्चा हो सकती है।
लेकिन चर्चा का आधार होना चाहिए—
दस्तावेज, सरकारी आदेश, तारीख और वास्तविक नामकरण प्रक्रिया।
सिर्फ राजनीतिक आरोप पर्याप्त नहीं हैं।
4. 🛫 एयरपोर्ट के नाम का प्रश्न
भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के रिकॉर्ड बताते हैं कि एयरपोर्ट का नामकरण अक्सर किसी क्षेत्रीय या राष्ट्रीय महत्व के व्यक्ति के योगदान के आधार पर किया गया है।
उदाहरण के लिए आधिकारिक सूची में—
Sardar Vallabhbhai Patel International Airport
Jai Prakash Narayan Airport
Maharana Pratap Airport
Biju Patnaik Airport
Birsa Munda Airport
Ahilyabai Holkar Airport
Veer Savarkar Airport
Dr. Babasaheb Ambedkar International Airport
Lal Bahadur Shastri Airport
जैसे नाम शामिल हैं।
इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारत में सार्वजनिक संस्थानों के नाम केवल एक धार्मिक समुदाय के व्यक्तियों पर आधारित नहीं हैं।
5. 🕌 “मुस्लिम नाम” और “मुस्लिम भारतीय” में अंतर समझना जरूरी है
यह बहुत महत्वपूर्ण बात है।
उदाहरण के लिए किसी सड़क का नाम किसी मध्यकालीन मुस्लिम शासक के नाम पर होना एक विषय है।
लेकिन डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे भारतीय वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति का नाम किसी संस्था या सड़क पर होना बिल्कुल अलग विषय है।
किसी व्यक्ति का मुस्लिम होना अपने-आप में उसके नाम को सार्वजनिक जीवन से हटाने का कारण नहीं हो सकता।
सवाल होना चाहिए—
> उस व्यक्ति का भारत के लिए योगदान क्या था?
यही समान कसौटी सभी पर लागू होनी चाहिए।
6. ⚖️ अगर किसी ऐतिहासिक शासक की भूमिका विवादित है तो?
यहाँ एक संतुलित नीति आवश्यक है।
यदि किसी ऐतिहासिक शासक के शासन से—
युद्ध,
राजनीतिक दमन,
धार्मिक संघर्ष,
मंदिरों के विध्वंस,
अत्याचार
जैसी घटनाओं के ऐतिहासिक प्रमाण जुड़े हैं, तो उसके नाम पर सार्वजनिक स्थान होने पर पुनर्विचार की मांग लोकतांत्रिक रूप से उठाई जा सकती है।
लेकिन केवल उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर नहीं।
कसौटी व्यक्ति के कर्म होने चाहिए, धर्म नहीं।
---7. 📜 भारत में नाम बदलने की परंपरा पहले से मौजूद है
भारत में अनेक नाम बदले गए हैं।
NDMC के आधिकारिक रिकॉर्ड में सड़क नाम बदलने के कई उदाहरण दर्ज हैं।
केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड में भी विभिन्न शहरों के नाम बदलने की प्रक्रिया दर्ज है। उदाहरण के लिए Allahabad → Prayagraj का परिवर्तन 2018 में दर्ज है।
उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक विवरण में भी प्रयागराज के नाम के ऐतिहासिक विकास और वर्तमान नाम का उल्लेख है।
इसी प्रकार महाराष्ट्र में Aurangabad →