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  • The fragmentation in the name of Lord Vishwakarma Puja must end. A resolution of one date, one worship, one society is necessary, says Ashok Vishwakarma.

भगवान विश्वकर्मा पूजा के नाम पर बिखराव बंद हो,एक तिथि एक पूजा एक समाज का संकल्प जरूरी, अशोक विश्वकर्मा

व्यक्तिगत राजनीतिक स्वार्थ लाभ की भावना से काम करने वाले लोग समाज को दे रहे हैं धोखा

ऑल इंडिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने कहा है कि भगवान विश्वकर्मा पूजा के नाम पर अलग-अलग तिथियों में समाज के अलग-अलग नेताओं और संगठनों के द्वारा अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाने से लोगों में गलत संदेश जाता है, इससे पता चलता है कि विश्वकर्मा समाज में एकता नहीं है, सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ लाभ के लिए समाज को धोखा दिया जा रहा है। भगवान का गौरव इससे नहीं, एकता से स्थापित होगा उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सामाजिक विखराव को कैसे रोका जाए यह सबसे बड़ी और गंभीर सामाजिक चुनौती है। एक तिथि -एक समाज, एक उत्सव का संकल्प ही सामाजिक एकता की जड़ों को मजबूत करेगा।शास्त्रों के अनुसार विश्वकर्मा पूजा का सर्वमान्य तिथि_कन्या संक्रांति (17 सितंबर)_ को ही है। इसलिए इसी दिन राष्ट्रीय, राजकीय, और जनपदीय स्तर पर सबका एक साझा मंच बनाकर पूजा का समारोह और उत्सव धूमधाम के साथ होना चाहिए। इसके लिए समाज के सभी  संगठनों के अध्यक्ष को मिलाकर एक _“श्री विश्वकर्मा पूजा केंद्रीय महासमिति”बनाई जाए। और सर्व समिति से व्यापक पैमाने पर कार्यक्रम की रूपरेखा तय की जाए उन्होंने कहा भगवान विश्वकर्मा समाज के गौरव आस्था और स्वाभिमान के प्रतीक है इसलिए इस अवसर को मेला नहीं, मिशन बनाना चाहिए।