*उत्तम संयम धर्म के अवसर पर मंदिरों में हुए विविध धार्मिक आयोजन, बच्चों ने भजनों से बांधा समां*
*मंडल प्रभारी अवनीत कुमार शर्मा*
रामपुर। जैन धर्म के दस धर्मों में उत्तम संयम धर्म का विशेष महत्व है। संयम केवल अपनी इंद्रियों को रोकने का नाम नहीं, बल्कि मन, वचन और शरीर को मर्यादित रखते हुए आत्मा को विकारों से मुक्त करने की साधना है। उत्तम संयम मनुष्य को अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना, सुख-दुःख और मान-अपमान में समान भाव रखना तथा जीवन को अहिंसा, करुणा और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ाना सिखाता है पर्यूषण पर्व के दौरान सोमवार को रामपुर के जैन मंदिरों में उत्तम संयम धर्म की विशेष आराधना की गई। मंदिरों में पूजा-अर्चना, धार्मिक कार्यक्रमों और भक्ति आयोजनों के बीच श्रद्धालुओं ने संयम के महत्व को समझा और आत्मचिंतन किया। दिनभर मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहे 84 कोस मथुरा से रामपुर पहुंचे शास्त्री नमन जैन और शास्त्री आर्जव जैन ने श्रद्धालुओं को उत्तम संयम धर्म का मर्म समझाते हुए कहा कि संयम का वास्तविक अर्थ केवल बाहरी नियमों का पालन करना नहीं, बल्कि अपने भीतर उठने वाले विकारों पर नियंत्रण करना है। मनुष्य यदि अपनी इच्छाओं, क्रोध, लोभ, अहंकार और असंयमित वाणी पर विजय प्राप्त कर ले तो यही सच्चे अर्थों में आत्मविजय की शुरुआत है उत्तम संयम धर्म के अवसर पर श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में छोटे बच्चों के लिए भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ भगवान के भजन प्रस्तुत किए। बच्चों की मधुर प्रस्तुतियों ने मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। प्रतियोगिता के दौरान बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था वहीं श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में धर्म चक्र कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म के मूल सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारने और आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया गया। धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की श्री आदिनाथ मंदिर में ज्ञान माला सेवा समिति की ओर से महाआरती का भव्य आयोजन किया गया। महाआरती में शामिल होने के लिए श्रावक-श्राविकाएं अपने-अपने घरों से विशेष रूप से सजाकर आरती की थालियां लेकर पहुंचे। मंदिर परिसर में जब सभी श्रद्धालु आरती की थालियां लेकर एकत्र हुए तो पूरा वातावरण श्रद्धा और भक्ति से भर उठा महाआरती के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भाव नृत्य किया। इसके बाद लगभग 201 दीपकों से श्रीजी की आरती की गई। एक साथ जलते सैकड़ों दीपकों की रोशनी से मंदिर परिसर जगमगा उठा। दीपों की कतार और भक्तों के जयकारों ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया दिनभर चले धार्मिक आयोजनों ने यह संदेश दिया कि संयम बाहरी बंधन नहीं, बल्कि आत्मा को स्वतंत्रता की ओर ले जाने वाली साधना है। यही कारण है कि जैन धर्म में उत्तम संयम को आत्मशुद्धि और आत्मविजय का महत्वपूर्ण मार्ग माना गया है। इस मौके पर दिनेश जैन खंडेलवाल, प्रदीप कुमार जैन, एड प्रमोद कुमार जैन, अविरल जैन, विशाल जैन, आशीष जैन, दिनेश जैन सेठी, डॉ शीनू जैन, डॉ ज्ञानेंद्र जैन, अलका जैन, राजीव जैन आदि बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।