वाराणसी, विज्ञान भारती का 7वां राष्ट्रीय अधिवेशन रविवार को स्वतंत्रता भवन में संपन्न हुआ। समापन सत्र में नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए वैज्ञानिक नवाचार और भारत-केंद्रित विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वदेशी नवाचार का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि भारतीय जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करना है।
नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोवर्धन दास ने भारत की वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक विरासत को भविष्य निर्माण का आधार बताया। वहीं, बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि नई पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में ठोस उपलब्धियां हासिल करनी होंगी।
अधिवेशन के समापन पर विज्ञान भारती ने सर्वसम्मति से भारत-केंद्रित विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति बनाने का प्रस्ताव पारित किया। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए 1200 से अधिक वैज्ञानिक, शिक्षाविद और शोधार्थियों ने भाग लिया।