चंपत राय व अनिल मिश्रा से इस्तीफा ले लिया गया है।

 हिन्दुओं को योगी आदित्यनाथ पर विश्वास रखना चाहिए। धर्मदंड जनता ने उनके हाथों में सौंपी है, वो निराश नहीं करेंगे।

कहा जा रहा था कि चंपत राय की तरफ़ से तमाम नेताओं को फोन किए जा रहे थे, इम्युनिटी के लिए। तरह तरह के तर्क दिए गए कि रामजन्म भूमि से 40 वर्षों से जुड़े है। लेकिन, योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों उनके साथ मंच साझा करने से इनकार करके ये सन्देश दे दिया था कि उन्हें दाग़ बर्दाश्त नहीं है। मजबूरी में चंपत राय को अपना प्रतिनिधि भेजना पड़ा।

राम मंदिर के एक-एक रुपए का हिसाब होगा। सीएम योगी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए SIT गठित की, तुरंत रिपोर्ट भी तलब की और फिर 8 लोगो पर FIR दर्ज करवाया। अब इस्तीफे शुरू हो गए हैं। इसके बाद क़ानूनी कार्रवाई की बारी है। इंतज़ार कीजिए। रामभक्तों के रक्त से सरयू को लाल कर देने वाले राम विरोधी नेताओं के झाँसे में मत आइए। अयोध्या में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास व सौंदर्यीकरण को लेकर सीएम योगी ने व्यक्तिगत ऊर्जा झोंकी है। बहुत मेहनत की है। योगी जी ने भूमि पूजन के दौरान ही कहा था कि "राम काज कीन्हे बिनु मोहि कहाँ बिश्राम"

अयोध्या के विकास, सुरक्षा और हिन्दुओं की आस्था के आड़े जो भी आएगा वो नपेगा। यही सनातनी संत की पहचान है।

जय श्री राम 🚩