वाराणसी, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 44वें दीक्षान्त महोत्सव की श्रृंखला के तहत गुरुवार को योग साधना केन्द्र में चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि चित्रकला केवल रंगों का संयोजन नहीं, बल्कि कल्पनाशक्ति, संवेदनशीलता और सांस्कृतिक चेतना की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास और सृजनात्मक प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा ने कहा कि प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों की मौलिक सोच और कलात्मक दक्षता को विकसित करने का प्रभावी माध्यम हैं। प्रतियोगिता का संयोजन डॉ. रविशंकर पाण्डेय, डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव एवं डॉ. ज्ञानेन्द्र सापकोटा ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।