• Home
  • Delhi
  • New Delhi
  • Khosla paid tribute to the martyrs of the 1962 Chinese invasion of India

चीन द्वारा 1962 में भारत पर किए आक्रमण के शहीदों को दी श्रद्धांजलि :खोसला

नई दिल्ली। भारत-तिब्बत सहयोग मंच दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष भूषण कुमार जैन के नेतृत्व में आज चीनी दूतावास के बाहर एक विशाल प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस दौरान 1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रदर्शन में मंच के महामंत्री कमल जी, भीम ब्रिगेड ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव जोली खोसला, सुखमनी सेवा ट्रस्ट के संस्थापक राजू रहेजा सहित बड़ी संख्या में राष्ट्रभक्त उपस्थित रहे।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए राजीव जोली खोसला ने भारत-चीन व्यापारिक संबंधों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में चीन का हजारों करोड़ रुपये का व्यापार हो रहा है, जिसका भारतीयों को संगठित रूप से विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और आत्मसम्मान से समझौता कर किसी भी प्रकार की आर्थिक निर्भरता स्वीकार नहीं की जा सकती

खोसला ने कोरोना महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि इस वैश्विक संकट ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया और भारत को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने आम नागरिकों से विदेशी उत्पादों के बहिष्कार और स्वदेशी को अपनाने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने 1962 के भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत और चीन के बीच रिश्तों में तनाव की शुरुआत पंचशील समझौते के बाद धीरे-धीरे बढ़ी। यह समझौता भारत और तिब्बत क्षेत्र के बीच आपसी संबंधों और व्यापार को लेकर किया गया था।

क्या था पंचशील समझौता

पंचशील समझौता पांच सिद्धांतों पर आधारित था, जिसे अप्रैल 1954 में भारत और चीन के बीच औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया। इस समझौते पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और चीन के प्रधानमंत्री चाउ एन-लाई ने हस्ताक्षर किए थे।

‘पंचशील’ शब्द का अर्थ है पांच नैतिक सिद्धांत, जो बौद्ध दर्शन से प्रेरित हैं और शांति, अहिंसा तथा आपसी सम्मान पर आधारित हैं।

वक्ताओं ने कहा कि भारत ने तिब्बत मुद्दे पर लंबे समय तक संयम बरता, लेकिन 1959 में दलाई लामा को भारत द्वारा शरण दिए जाने के बाद दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट बढ़ गई, जिसका परिणाम 1962 के युद्ध के रूप में सामने आया।

प्रदर्शन के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने शहीदों को नमन करते हुए देश की एकता, संप्रभुता और आत्मनिर्भरता के संकल्प को दोहराया।