1. आरक्षण और मेरिट का संकट: सरकारी नौकरियों, मेडिकल और इंजीनियरिंग की सीटों में अति आरक्षण के कारण सवर्ण और सामान्य वर्ग के मेधावी बच्चे, चाहे कितने भी नंबर लाएं, बाहर रह जा रहे हैं। बच्चों की मेहनत का कोई मूल्य नहीं रह गया है। 10% EWS भी जमीन पर पूरी तरह लागू नहीं हो रहा।
2. शिक्षा और कोचिंग की महंगाई: सरकारी स्कूलों में सुविधाओं का अभाव और शिक्षकों की कमी के कारण अभिभावकों को महंगी प्राइवेट कोचिंग का सहारा लेना पड़ रहा है। NEET, JEE जैसी परीक्षाओं की कोचिंग लाखों में पहुंच गई है। मध्यम वर्ग के बच्चे पैसों के अभाव में पीछे छूट रहे हैं।
3. पोषण की बदहाली: मिड-डे मील और आंगनबाड़ी में बच्चों को मिलने वाला पोषण घटिया क्वालिटी का है। कुपोषण के आंकड़े घटने के बजाय बढ़ रहे हैं। एक स्वस्थ बच्चा ही राष्ट्र का भविष्य है।
4. छात्रवृत्ति में भेदभाव: मेधावी सवर्ण छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं या तो बंद हैं या इतनी जटिल कर दी गई हैं कि पात्र बच्चों को भी उसका लाभ नहीं मिल पाता। शिक्षा में बराबरी का अधिकार सिर्फ कागजों तक सीमित है।
5. सुरक्षा का मुद्दा: प्रदेश में नाबालिग बच्चों, विशेषकर बेटियों के खिलाफ अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। सरकार सिर्फ आंकड़े गिनाती है, धरातल पर बच्चों को सुरक्षित माहौल नहीं मिल रहा।
6. संस्कार और पहचान: बच्चों को पाठ्यक्रम में हमारे सनातन महापुरुषों, भगवान परशुराम जी, महाराणा प्रताप, अहिल्याबाई होलकर के जीवन से दूर रखा जा रहा है।
मेरा वक्तव्य:
"भाजपा सरकार सिर्फ भाषणों में 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' की बात करती है। हकीकत यह है कि हमारे बच्चों के लिए न आरक्षण में न्याय है, न सस्ती शिक्षा है, न समय पर छात्रवृत्ति है, न पौष्टिक भोजन है, न सुरक्षा है।
सर्वजन सनातन पार्टी की मांग है कि सरकार तुरंत 1. मेरिट आधारित समान अवसर, 2. EWS का 100% क्रियान्वयन, 3. बिना भेदभाव छात्रवृत्ति, 4. सस्ती शिक्षा, 5. पौष्टिक मिड-डे मील, और 6. सनातन संस्कार आधारित पाठ्यक्रम लागू करे।"
पार्टी आने वाले समय में इस मुद्दे को लेकर गांव-गांव में जनजागरण अभियान चलाएगी।