हमारा जीवन ऐसा होना चाहिए कि हमारे जाने के बाद लोग केवल हमारी संपत्ति, पद या प्रतिष्ठा को याद न करें, बल्कि हमारे सद्कर्मों से मिली प्रेरणा को अपने जीवन में जीवित रखें। हमारा अस्तित्व किसी के लिए सहारा बने, हमारा व्यवहार किसी के लिए प्रेरणा बने और हमारे कर्म समाज में प्रेम, सद्भाव, सदाचार तथा लोकमंगल का आधार बनें अंततः, जीवन की महानता इस बात से नहीं मापी जाती कि हमने अपने लिए कितना संग्रह किया, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि हमने अपने जीवन से दूसरों के लिए कितना सद्भाव, सहयोग और कल्याण उत्पन्न किया आइए, हम अपने जीवन को केवल अपने लिए जीने के बजाय मानवता के लिए समर्पित करें। अपने भीतर करुणा जगाएँ, अपने आचरण में सेवा उतारें और अपने कर्मों से ऐसा संसार बनाने का प्रयास करें, जहाँ कोई दुःख में अकेला न हो और प्रत्येक मनुष्य दूसरे मनुष्य के सुख-दुःख का सहभागी बने।
मानव में देवत्व जगाने, धरती पर स्वर्ग सजाने।
धर्म मार्ग से राष्ट्र निर्माण — राष्ट्र रक्षा, विश्व कल्याण ही लक्ष्य।
सेवार्थ।
संत त्यागीजी आश्रम विश्व कल्याण परिवार ज्ञान तीर्थ
विलायत कला, कटनी, मध्य प्रदेश, भारत
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