हाथरस 16 अप्रैल, 2026 । जिला प्रोबेशन अधिकारी सीमा मौर्या द्वारा जन मानस से अपील की है कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 के अन्तर्गत बाल विवाह एक दण्डनीय अपराध है किसी भी बालिका जिसने अपनी आयु 18 वर्ष पूर्ण न की हो एवं ऐसे बालक जिसने अपनी आयु 21 वर्ष पूर्ण न की हो का विवाह कराया जाना प्रतिबन्धित है समाज में व्याप्त अंधविश्वास एवं रुढीवादी परम्परा के कारण समाज के कुछ अनिभायक/संरक्षकों द्वारा अपने पुत्र/पुत्रियों की शादी अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर पावन एवं शुभ मानकर की जाती है। इस अधिनियम के अनुसार बाल विवाह अधिनियम तथा पोक्सो एक्ट के तहत कार्यवाही की जायेगी जिसमें सजा व अर्थदण्ड दोनों का प्रावधान है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों के अन्तर्गत बाल विवाह कराने वाले व्यक्ति एवं अनुष्ठान करने वाले व्यक्तियों के लिए 02 वर्ष का कठोर कारावास एवं 01 लाख रू० जुर्माने का प्रावधान है। बाल विवाह कराने पर सम्मलित होने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही की जायेगी।
जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि अक्षय तृतीया (आखा तीज) के अवसर पर बाल विवाह करने की रूढ़िवादी परम्परा समाज में प्रचलित है। वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026 को पड़ रही है। आमजन से अपील की जाती है, कि बाल विवाह जैसी कुरीति पर प्रभावी अंकुश के लिए बाल विवाह जैसी घटना के संज्ञान में आने पर इसकी सूचना स्थानीय पुलिस स्टेशन चौकी एवं जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय में दे सकते है। इसके अत्तिरिक्त टोल फ्री नम्बर पुलिस लाइन-112, चाइल्ड हेल्पलाइन-1098, महिला हेल्पलाइन 181 पर दे सकते हैं। जिससे बाल विवाह को रोकने की कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके। बाल विवाह अधिनियम के तहत आयोजनों में सहभागिता सहयोग करने वाले व्यक्तियों को सचेत किया है कि बाल विवाह आयोजन में सम्मिलित व्यक्तियों के विरूद्ध नियमानुसार कानूनी कार्यवाही की जायेगी। वैवाहिक आयोजन कराने वाले प्रिन्टिंग प्रेस टैन्ट व्यवसायी, मैरिज हॉल, बैण्ड बाजा. कैटर्स, फोटोग्राफर, पुरोहित, मौलवी इत्यादि व्यक्तियों एवं संस्थाओं से भी अपेक्षा की है कि वैवाहिक आयोजन से पूर्व यह सुनिश्चित कर लें कि यह आयु 18 वर्ष एवं वर की आयु 21 वर्ष से कम न हो। आमजन तथा अभिभावकों से अपील की है कि बाल विवाह के कारण शारीरिक एवं मानसिक दुष्प्रभावों के मद्देनजर रखते हुए बालिका की शादी 18 वर्ष तथा बालक की शादी 21 वर्ष से पूर्व कदापि न करें।