वाराणसी, औराई क्षेत्र के गिर्द बड़गांव स्थित बाल पहरुआ केंद्र के सभागार में डॉ. शम्भुनाथ सिंह रिसर्च फाउंडेशन एवं पहरुआ जन संगठन द्वारा “नारी शक्ति वंदन अधिनियम: जागरूकता, नीति निर्माण में भागीदारी एवं नेतृत्व विकास” विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए फाउंडेशन की अध्यक्ष एवं मानवाधिकार अधिवक्ता एडवोकेट विजयश्री सिंह ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारतीय महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों की इच्छाशक्ति के अभाव और वोट की राजनीति के कारण यह विधेयक लंबे समय से लंबित रहा और हालिया प्रयास भी सफल नहीं हो सका।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए फाउंडेशन की निर्देशिका एवं पहरुआ की संयोजिका डॉ. रोली सिंह ने कहा कि वर्षों से लंबित यह अधिनियम लोकतंत्र की वास्तविक पहचान को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अधिकार, सम्मान और समानता दिलाने का प्रयास अभी अधूरा है, जिसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
प्रारंभ में फाउंडेशन के महासचिव एवं मुख्य कार्यकारी राजीव कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि यह कार्यक्रम प्रदेश संयोजक एवं महिला कल्याण, बाल विकास व पोषाहार मंत्री श्रीमती बेबीरानी मौर्य की प्रेरणा से आयोजित किया गया है। इसका उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों में अधिनियम के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उनके नेतृत्व कौशल का विकास करना है।
मुख्य वक्ता के रूप में स्त्री विमर्श कार्यकर्ता राजश्री शुक्ल ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने लैंगिक भेदभाव, समानता और भागीदारी से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए उनसे निपटने के उपाय भी साझा किए।
इस अवसर पर कार्यक्रम स्थल से गिर्द बड़गांव तिराहे तक जागरूकता रैली एवं मानव श्रृंखला का आयोजन किया गया। रैली का नेतृत्व किशोरी समूह की संयोजिकाओं अंजलि तिवारी एवं अंशु पटेल ने किया।
कार्यक्रम में संस्था की मुख्य पर्यवेक्षक श्वेता सिंह द्वारा अतिथियों का स्वागत तथा दीक्षा सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में क्षेत्र की किशोरियां, महिलाएं एवं संस्था के सदस्य उपस्थित रहे।