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  • Sanjay Singh's scathing attack on the conspiracy to divide the country under the pretext of delimitation, exposing the misleading propaganda on women's reservation.

महिला आरक्षण पर भ्रामक प्रचार का पर्दाफाश, डिलिमिटेशन के बहाने देश को बांटने की साजिश पर संजय सिंह का तीखा हमला |

“महिला आरक्षण बिल गिराने का विपक्ष पर आरोप पूरी तरह झूठ और भ्रामक” — संजय सिंह “गोदी मीडिया भाजपा का प्रचार तंत्र, चैनलों को भाजपा मीडिया प्रकोष्ठ बना लेना चाहिए” — संजय सिंह “यह महिला आरक्षण नहीं, ‘बीजेपी जिताओ बिल’ था, विपक्ष ने साजिश नाकाम की” — संजय सिंह “डिलिमिटेशन के नाम पर उत्तर-दक्षिण में संघर्ष कराने की कोशिश को विपक्ष ने मिलकर रोका” — संजय सिंह भाजपा “टुकड़े-टुकड़े गैंग" बनकर देश को बांटने का काम कर रही थी, विपक्ष ने मिलकर साजिश को ध्वस्त किया: संजय सिंह “543 सीटों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण तुरंत लागू करें, आम आदमी पार्टी पूरा समर्थन देगी” — संजय सिंह

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने शनिवार को जारी अपने बयान में महिला आरक्षण बिल को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार और संसद में डिलिमिटेशन से जुड़े घटनाक्रम पर केंद्र सरकार तथा भाजपा पर तीखा और सीधा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण बिल न तो गिरा है और न ही उसमें कोई बदलाव हुआ है, बल्कि यह पहले से पारित और लागू है। विपक्ष ने केवल उस संशोधन को गिराया है जिसके जरिए भाजपा महिला आरक्षण की आड़ में डिलिमिटेशन के माध्यम से देश में विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देना चाहती थी।

संजय सिंह ने कहा कि बीते एक दिन से पूरे देश में झूठ और भ्रम का माहौल बनाया जा रहा है कि विपक्ष ने महिला आरक्षण बिल गिरा दिया, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल आज भी पूरी तरह लागू है और केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल 2026 को, पूरे तीन साल बाद, उसे आनन-फानन में नोटिफाई किया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर तीन साल तक इस बिल को क्यों लटकाकर रखा गया और अब अचानक इसे लागू करने की क्या मजबूरी आ गई।

उन्होंने मीडिया की भूमिका पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि गोदी मीडिया बिना तथ्य जांचे वही दोहरा रहा है जो प्रधानमंत्री और भाजपा के नेता कहते हैं। उन्होंने कहा कि कई बड़े अखबारों ने भ्रामक सुर्खियां लगाकर जनता को गुमराह किया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कहीं “महिला आरक्षण बिल गिरा” तो कहीं “महिला आरक्षण पर विपक्ष का अड़ंगा” जैसी हेडलाइन चलाई गई, जो पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक हैं। उन्होंने कहा कि इतने पढ़े-लिखे संपादकों के होते हुए इस तरह की पत्रकारिता लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

संजय सिंह ने कहा कि भाजपा महिला अधिकारों के नाम पर राजनीति कर रही है, जबकि उसका रिकॉर्ड इसके उलट है। उन्होंने कहा कि जो पार्टी मणिपुर की घटनाओं पर चुप रहती है, हाथरस कांड पर चुप रहती है, अंकिता भंडारी जैसे मामलों में चुप्पी साध लेती है, वह आज महिला हितैषी बनने का नाटक कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस विचारधारा में महिलाओं को बराबरी का स्थान नहीं मिला, वह आज महिलाओं के नाम पर वोट मांग रही है।

उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा लाया गया संशोधन वास्तव में “महिला आरक्षण बिल” नहीं बल्कि “बीजेपी जिताओ बिल” था, जिसका मकसद चुनावी गणित के आधार पर अपनी सीटें बढ़ाना और लोकतंत्र को कमजोर करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल महिला अधिकारों की आड़ में राजनीतिक लाभ लेने का एक सुनियोजित षड्यंत्र था, जिसे विपक्ष की एकजुटता ने संसद में पूरी तरह नाकाम कर दिया।

संजय सिंह ने कहा कि वर्ष 2023 में पारित बिल में स्पष्ट था कि पहले जनगणना होगी, फिर डिलिमिटेशन और उसके बाद आरक्षण लागू होगा, जिसका मतलब यह था कि यह व्यवस्था 2034 तक टल सकती थी। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने तब भी मांग की थी कि 543 सीटों में तत्काल 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जाए, लेकिन सरकार ने इसे टाल दिया। उन्होंने दोहराया कि आज भी आम आदमी पार्टी की यही मांग है कि 543 सीटों में 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू किया जाए।

डिलिमिटेशन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भाजपा 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण करना चाहती थी, जिससे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, उड़ीसा और केरल जैसे राज्यों की सीटें कम हो जातीं। उन्होंने कहा कि यह सीधे-सीधे राज्यों के बीच असंतोष पैदा करने और उत्तर-दक्षिण के बीच टकराव खड़ा करने की साजिश थी। उन्होंने जनता से सवाल किया कि क्या वे देश में झगड़ा और विभाजन चाहते हैं या शांति और एकता।

उन्होंने कहा कि भाजपा “टुकड़े-टुकड़े गैंग” की तरह देश को बांटने का काम कर रही थी, लेकिन संसद में विपक्ष ने मिलकर इस साजिश को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा को उम्मीद थी कि वह इस मुद्दे को चुनावी हथियार बनाएगी, लेकिन इसके उलट यह मुद्दा तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भाजपा के खिलाफ चला गया और वहां जनता ने इसे अपने सम्मान और प्रतिनिधित्व से जोड़ लिया है।

संजय सिंह ने एक कथित स्टिंग ऑपरेशन का हवाला देते हुए भाजपा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हुमायूं कबीर से जुड़े एक मामले में यह सामने आया है कि उसे चुनाव लड़ने के लिए भारी आर्थिक मदद दी गई और उसे सरकारी सुरक्षा भी प्रदान की गई। उन्होंने पूछा कि ऐसे व्यक्ति को संरक्षण देने के पीछे सरकार की क्या मंशा है और क्या यह समाज में विवाद पैदा करने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

संजय सिंह ने देश की जनता से अपील की कि वे इस तरह के भ्रामक प्रचार और विभाजनकारी राजनीति से सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि सच्चा देशभक्त वही है जो देश में शांति, एकता और सद्भाव बनाए रखने के पक्ष में खड़ा हो। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ खिलवाड़ जारी रखा, तो जनता उसे करारा जवाब देने के लिए तैयार बैठी है।