भारत माँ संस्कारों से जीना सिखाती है। माँ घर का दीपक जलाती है, भारत माँ पूरे राष्ट्र का भविष्य सजाती है।
जिस तरह अपनी माँ की आँखों में आँसू आने नहीं देते हम, उसी तरह भारत माँ की शान पर कभी आंच न आने दें हम।
माँ भूखी रहकर भी बच्चों को खिलाती है, भारत माँ अपने वीरों के बलिदान से
हम सबको सुरक्षित रखती है। दोनों का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता, बस सम्मान और सेवा से निभाया जा सकता है।
यदि हर बेटा अपनी माँ के संस्कार और भारत माँ के सम्मान को समझ जाए, तो घर-घर में मानवता होगी, और राष्ट्र निर्माण का नया सूरज उग जाए।
आओ आज संकल्प करें —जिस श्रद्धा से अपनी माँ को पूजते हैं, उसी भक्ति से भारत माँ का मान बढ़ाएँगे। अपने कर्म, अपने संस्कार और अपने प्रयासों से एक सशक्त, संस्कारी और महान राष्ट्र बनाएँगे।
माँ और भारत माँ दोनों ही हमारे अस्तित्व की पहचान हैं, एक से जीवन मिला है, दूसरी से जीवन का सम्मान है।