मुरादाबाद /उत्तर प्रदेश/मुरादाबाद: निर्यात संवर्धन परिषद हस्तशिल्प (ईपीसीएच), मुरादाबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), गाजियाबाद शाखा कार्यालय, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से "बीआईएस मानकों, गुणवत्ता प्रमाणन एवं परीक्षण सुविधाओं" विषय पर एक इंटरैक्टिव उद्योग जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हस्तशिल्प निर्यातकों एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भारतीय मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (QCOs) तथा बीआईएस लाइसेंसिंग की सरल प्रक्रियाओं से अवगत कराना था।
कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी था कि उद्योग जगत में व्याप्त इस धारणा को दूर किया जाए कि बीआईएस केवल एक सख्त नियामक संस्था है। कार्यक्रम के दौरान बीआईएस अधिकारियों ने श्रीमती जी. भवानी का संदेश साझा करते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय मानक ब्यूरो का उद्देश्य उद्योगों के लिए बाधाएँ उत्पन्न करना या उन पर दबाव बनाना नहीं है, बल्कि तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हुए उन्हें गुणवत्ता उत्कृष्टता प्राप्त करने में सहयोग देना तथा एक मार्गदर्शक (Handholding Partner) की भूमिका निभाना है।
तकनीकी सत्र के दौरान श्री राज कुमार, वैज्ञानिक-बी एवं सहायक निदेशक, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस); डॉ. सुखदेव प्रजापति, वैज्ञानिक-बी, नेशनल टेस्ट हाउस, श्री शैलेश पार्टे, वैज्ञानिक-बी, नेशनल टेस्ट हाउस; श्री राजू शर्मा, वैज्ञानिक-सी, सेंट्रल लेबोरेटरी; तथा श्री आयुष राज, स्टैंडर्ड प्रमोशन ऑफिसर, बीआईएस द्वारा विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं। विशेषज्ञों ने गुणवत्ता मानकों, भारतीय मानकों (Indian Standards), उत्पाद प्रमाणन योजनाओं, हॉलमार्किंग, प्रबंधन प्रणाली प्रमाणन (Management System Certification), परीक्षण अवसंरचना तथा एमएसएमई के समर्थन हेतु बीआईएस द्वारा संचालित विभिन्न पहलों की जानकारी प्रदान की। प्रतिभागियों को गुणवत्ता मानकों को अपनाने एवं आवश्यक प्रमाणन प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे उनके उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़े तथा घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता सुदृढ़ हो सके।
ईपीसीएच के अध्यक्ष श्री नीरज खन्ना ने अपने संदेश में कहा कि आज के वैश्विक व्यापार परिदृश्य में गुणवत्ता, मानकीकरण एवं अनुपालन का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। भारतीय हस्तशिल्प निर्यातकों को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का विश्वास मजबूत हो तथा वैश्विक बाजारों में उनकी भागीदारी बढ़ सके। बीआईएस, नेशनल टेस्ट हाउस एवं सेंट्रल लेबोरेटरी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से आयोजित ऐसे जागरूकता कार्यक्रम निर्यातकों को उत्पाद गुणवत्ता सुधारने, नियामकीय आवश्यकताओं का पालन करने तथा निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराते हैं। ईपीसीएच हस्तशिल्प क्षेत्र के सतत विकास हेतु ऐसे ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम में यंग एंटरप्रेन्योर सोसाइटी (YES) के अध्यक्ष श्री जे.पी. सिंह, हैंडिक्राफ्ट डेवलपमेंट सोसाइटी (HDS) के अध्यक्ष श्री सुरेश गुप्ता, YES के उपाध्यक्ष श्री गगन दुग्गल, श्री विनय मंगला, श्री तनुज टंडन, सेंटर फॉर हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्ट मैनेजमेंट स्टडीज़ (CHEMS) के विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में हस्तशिल्प निर्यातकों, उद्यमियों एवं उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि गुणवत्ता मानकों को अपनाना भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें उद्यमियों ने बीआईएस प्रमाणन एवं अनुपालन से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक प्रश्न पूछे। बीआईएस अधिकारियों ने सभी प्रश्नों का विस्तारपूर्वक समाधान प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम के अंत में बीआईएस एवं आईआईए (IIA) के प्रतिनिधियों ने सभी निर्माताओं से भारतीय मानकों को अपनाने तथा गुणवत्ता मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया, जिससे भारतीय उत्पादों की घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और अधिक सुदृढ़ हो सके।