विद्यार्थियों में बढ़ते 'डिजिटल व्यसन' को रोकने के लिए यूपी में कर्नाटक की तर्ज पर 'स्क्रीन टाइम' पर प्रतिबंध लगाया जाए !
लखनऊ/वाराणसी। डिजिटल व्यसन की बढ़ती समस्या को रोकने के लिए कर्नाटक की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी छात्रों का पढ़ाई के अतिरिक्त 'स्क्रीन टाइम' प्रतिदिन 1 घंटा सीमित किया जाए और शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाए इस मांग हेतु हिन्दू जनजागृति समिति के सुराज्य अभियान की ओर से यहां के जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की गई |
इस समय वाराणसी व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा, वाराणसी व्यापार मंडल के महामंत्री कवींद्र जायसवाल, चौरसिया व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुनील चौरसिया, राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति के संयोजक अधिवक्ता अरुण कुमार मौर्य एवं अधिवक्ता संजीवन यादव अधिवक्ता अवनीश राय, सुनील गुप्ता और समिति के राजन केशरी उपस्थित थे ।
कर्नाटक सरकार के अनुसार, लगभग 25 प्रतिशत किशोर इंटरनेट के आदी हैं । इसके कारण नींद की कमी, चिंता और एकाग्रता में कमी (लक्ष्य विचलित होना) जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं । गोवा सरकार भी 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है और समझा जाता है कि इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए एक समिति नियुक्त की गई है ।
इस समय की गई अन्य माँगें :
1.छात्रों के हित में उत्तरप्रदेश में छात्रों के लिए 'डिजिटल' उपयोग के संबंध में नीति तैयार की जाए ।
2.प्रत्येक स्कूल अपनी 'डिजिटल उपयोग नीति' तैयार करे, जिसमें 'डिजिटल डिटॉक्स डे' और 'टेक-फ्री' समय शामिल हो ।
3.इंटरनेट के अत्यधिक उपयोग के कारण होने वाली चिंता, नींद की कमी और एकाग्रता के अभाव जैसी समस्याओं के लिए स्कूलों में सक्षम काउंसलिंग व्यवस्था उपलब्ध होनी चाहिए ।
4.छात्रों को साइबर बुलिंग, गोपनीयता और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार के बारे में शिक्षा दी जानी चाहिए ।
5.16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त नियम तैयार किए जाने चाहिए ।
6.घर में 'नो-फोन ज़ोन' तैयार करने और बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर नजर रखने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ।