🕉️🚩 UGC रोलबैक के समर्थन में राष्ट्रीय युवा वाहिनी का आक्रोश 🚩🕉️

उच्च शिक्षा की व्यवस्था में समानता, निष्पक्षता और सभी विद्यार्थियों के अधिकारों की स्पष्ट गारंटी हो—केंद्र सरकार UGC विनियम 2026 पर पुनर्विचार कर उचित निर्णय ले”

लखनऊ | 20 सितंबर 2026

राष्ट्रीय युवा वाहिनी एवं राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर भाजपा के गौ प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हिंदूवादी पंडित हृदेश शर्मा ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के वर्ष 2026 के Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations को लेकर चल रही बहस के बीच अपनी चिंता और आक्रोश व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से इन विनियमों पर व्यापक पुनर्विचार कर आवश्यक होने पर रोलबैक/वापसी की मांग की है UGC की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ये विनियम 13 जनवरी 2026 को प्रकाशित किए गए थे। इनका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव से निपटने तथा समानता को बढ़ावा देने की व्यवस्था बनाना है पंडित हृदेश शर्मा ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में किसी भी विद्यार्थी के साथ जाति, वर्ग, क्षेत्र, भाषा, आर्थिक स्थिति अथवा किसी अन्य आधार पर अन्याय नहीं होना चाहिए। साथ ही ऐसी कोई भी व्यवस्था नहीं बननी चाहिए जिससे किसी वर्ग के विद्यार्थियों के बीच भेदभाव की भावना, असुरक्षा या अविश्वास पैदा हो उन्होंने कहा कि—«“हमारा स्पष्ट मत है कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय ज्ञान, प्रतिभा, अनुसंधान और समान अवसर के केंद्र होने चाहिए। किसी भी विद्यार्थी को न्याय मिले और किसी निर्दोष विद्यार्थी के अधिकार प्रभावित न हों—नीति निर्माण का मूल उद्देश्य यही होना चाहिए।”» केंद्र सरकार से पुनर्विचार और रोलबैक की मांग पंडित हृदेश शर्मा ने केंद्र सरकार से मांग की कि UGC Regulations 2026 के प्रत्येक प्रावधान की विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक समीक्षा की जाए उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रावधान से किसी वर्ग के विद्यार्थियों के साथ असमान व्यवहार की आशंका उत्पन्न होती है अथवा उसके दुरुपयोग की संभावना है, तो सरकार को उस प्रावधान को वापस लेने, संशोधित करने अथवा उसके स्थान पर अधिक स्पष्ट एवं संतुलित व्यवस्था लागू करने पर विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा—

«“सामाजिक न्याय का उद्देश्य किसी नए सामाजिक तनाव को जन्म देना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी को न्यायपूर्ण और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना होना चाहिए। इसलिए सरकार को इस विषय पर जल्दबाजी के बजाय व्यापक संवाद और पारदर्शी समीक्षा का रास्ता अपनाना चाहिए।”»

सुप्रीम कोर्ट में भी उठा है मामला UGC Regulations 2026 को लेकर मामला न्यायिक स्तर पर भी पहुंचा है। अगस्त 2026 में केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि 2026 के UGC Equity Regulations पर पुनर्विचार किया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट है कि नियमों को लेकर उठे प्रश्नों पर सरकार के स्तर पर भी समीक्षा की प्रक्रिया चल रही है पंडित हृदेश शर्मा ने कहा कि अब केंद्र सरकार को विद्यार्थियों और समाज के विभिन्न वर्गों की चिंताओं को गंभीरता से सुनते हुए ऐसा निर्णय लेना चाहिए जो संवैधानिक समानता, न्याय, पारदर्शिता और शैक्षणिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों के अनुरूप हो।

“शिक्षा में न्याय चाहिए, विवाद नहीं”

उन्होंने कहा कि भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। विश्वविद्यालयों में शिकायत निवारण और भेदभाव रोकने के प्रभावी तंत्र आवश्यक हैं, लेकिन इन व्यवस्थाओं में निष्पक्ष जांच, प्राकृतिक न्याय और सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी सुनिश्चित होना चाहिए।

उन्होंने कहा—

«“किसी भी शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, लेकिन शिकायत के साथ निष्पक्ष जांच भी उतनी ही आवश्यक है। न्याय की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें पीड़ित को संरक्षण मिले और निर्दोष को अनुचित कार्रवाई का भय न रहे।”»

राष्ट्रीय युवा वाहिनी की मांग

राष्ट्रीय युवा वाहिनी एवं राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर भाजपा की ओर से केंद्र सरकार के समक्ष निम्न मांगें रखी गईं—

1. UGC Regulations 2026 की व्यापक समीक्षा की जाए।

2. विवादित अथवा आपत्तिजनक पाए जाने वाले प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए।

3. आवश्यक होने पर संबंधित विनियमों को रोलबैक/वापस लिया जाए।

4. विद्यार्थियों के लिए शिकायत निवारण की निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

5. किसी भी विद्यार्थी के साथ जाति, वर्ग, क्षेत्र, भाषा या अन्य आधार पर भेदभाव न हो।

6. शिकायतों की जांच में प्राकृतिक न्याय और दोनों पक्षों को सुनने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।

7. शिक्षा नीति से जुड़े महत्वपूर्ण नियम बनाने से पहले विद्यार्थियों, शिक्षाविदों और संबंधित हितधारकों से व्यापक संवाद किया जाए।

8. उच्च शिक्षा संस्थानों में ऐसा वातावरण बनाया जाए जिसमें प्रतिभा, योग्यता, अनुशासन और समान अवसर को प्राथमिकता मिले।

पंडित हृदेश शर्मा का आह्वान

गौ प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हिंदूवादी पंडित हृदेश शर्मा ने कहा कि संगठन इस विषय को शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से उठाने के पक्ष में है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे को केवल राजनीतिक अथवा संगठनात्मक विवाद के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे देश के लाखों विद्यार्थियों और उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यापक विषय के रूप में देखा जाए।

उन्होंने कहा—

«“हम चाहते हैं कि भारत की शिक्षा व्यवस्था ऐसी हो जिसमें किसी विद्यार्थी को अपनी पहचान के कारण भय न हो, किसी विद्यार्थी के साथ अन्याय न हो और किसी निर्दोष विद्यार्थी के अधिकारों का हनन न हो। सरकार UGC Regulations 2026 पर पुनर्विचार करे और यदि आवश्यक हो तो इन्हें वापस लेकर ऐसी व्यवस्था बनाए जो सभी विद्यार्थियों के लिए न्यायपूर्ण, पारदर्शी और समान हो।”»

उन्होंने कहा