वाराणसी। उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय संयुक्त सफाई कर्मचारी संघ (रजि.) के प्रदेश अध्यक्ष सोनचंद बाल्मीकि ने सफाई कर्मचारियों के शोषण पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि मैनुअल स्कैवेंजर एक्ट-2013 के तहत गठित जिला स्तरीय सर्वेक्षण समिति की स्थिति बेहद निराशाजनक है। उनका आरोप है कि वाराणसी में जिला प्रशासन द्वारा समिति के सदस्यों का नामांकन किए जाने के बावजूद दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज तक समिति की एक भी बैठक आयोजित नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि समिति की बैठक न होने और नामित सदस्यों की उपेक्षा के कारण सफाई कर्मचारियों, विशेषकर अनुसूचित जाति समाज के लोगों तक सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का समुचित लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।
सोनचंद बाल्मीकि ने कहा कि भारत सरकार तथा सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई मैन्युअल रूप से न कराई जाए तथा सफाई कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। इसके बावजूद जलकल विभाग द्वारा सीवर सफाई के ठेके दिए जाते हैं और ठेकेदारों के माध्यम से बिना सुरक्षा उपकरणों तथा जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी के कर्मचारियों से जानलेवा परिस्थितियों में सीवर की सफाई कराई जाती है। इससे आए दिन जहरीली गैस और अन्य दुर्घटनाओं में सफाई कर्मचारियों की जान जाने की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
उन्होंने जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से मांग की कि सफाई कर्मचारियों के कल्याण के लिए गठित सर्वेक्षण समिति की शीघ्र बैठक बुलाई जाए, नामित सदस्यों से कर्मचारियों की समस्याओं पर चर्चा कर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही समिति के नामित सदस्यों की सूचना सभी विभागों को उपलब्ध कराई जाए तथा उन्हें विभागों में बैठने और कार्य करने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सोनचंद बाल्मीकि ने विश्वास जताया कि जिला प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करेगा