प्रति दिन भारत में upi का लेन देन ९६ हज़ार करोड़ का है
सरकार पर सालाना खर्च बीस हज़ार करोड़ है
मेरे विचार से सरकार को इसको वहन करना चाहिए क्योंकि जब दो हज़ार के ऊपर आधा परसेंट लगेगा तो वह उपभोक्ता को वहन करना होगा क्योंकि कोई भी शुल्क या टैक्स कोई व्यापारी अपनी जेब से नहीं देगा वह चार्ज करेगा नहीं तो दो हज़ार के ऊपर पेमेंट लेना बंद कर देगा क्योंकि बैंक पहले से ही हर लेन देंन मैसेज और हर चीज़ पर चार्ज ले रहे हैं व्यापार में वैसे ही मंदी है यह कदम सरकार का अनुचित है पहले से ही सरकार ने कई टैक्स कई शुल्क और कई सरचार्ज प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर के रूप में लगा रखे है
अमर नाथ मिश्र