बालगृह के छात्र देव ने 97.95 प्रतिशत अंक लाकर पेश की नजीर, डीएम बोले- बच्चों की शिक्षा और संरक्षण में नहीं आने देंगे कोई कमी
100 प्रतिशत ऑनलाइन हुई आवेदन प्रक्रिया, अब 23 साल की उम्र तक बच्चों के सीधे खाते में आ रही आर्थिक सहायता कोरोना महामारी के काले दौर में अपनों को खोने वाले बच्चों हों या सामान्य परिस्थितियों में बेसहारा हुए नौनिहाल, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना इनके जीवन में नया उजियारा भर रही है। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी श्री अजय कुमार द्विवेदी ने उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य की राह आसान करने के लिए 5 छात्र-छात्राओं को लैपटॉप वितरित किए। सरकारी संरक्षण में पल रहे बालगृह के बच्चों की प्रतिभा भी अब परवान चढ़ने लगी है, जिसने प्रशासनिक प्रयासों को सार्थक कर दिया है।
कलेक्ट्रेट में खिले चेहरे, डीएम ने बंधाया ढांढस
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जब पांच बच्चों के हाथों में लैपटॉप आए, तो उनके चेहरे पर भविष्य की उम्मीदें साफ झलक रही थीं। जिलाधिकारी ने नादरबाग की मढ़ैयान निवासी तनिष्का सक्सेना, सांई विहार कालोनी की रिद्धिमा पंकज, बजरिया झब्बू खां की आतिरा गुफरान, चमरौआ के अब्दुल जियान और बिलासपुर की नैना को लैपटॉप सौंपे।
बालगृह के देव ने रोशन किया जिले का नाम
एक तरफ जहां सरकारी योजनाएं अनाथ बच्चों का सहारा बन रही हैं, वहीं दूसरी तरफ राजकीय बालगृह में पल रहे नौनिहाल अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित राजकीय बालगृह (शिशु) में वर्तमान में 27 और दत्तक ग्रहण इकाई में 14 मासूमों को सुरक्षित आश्रय मिला हुआ है। सेंट पॉल स्कूल रामपुर में पढ़ने वाले बालगृह के होनहार छात्र देव ने अपनी कुशाग्र बुद्धि का परिचय देते हुए कक्षा-01 की परीक्षा में 97.95 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद देव की इस शानदार कामयाबी ने पूरे रामपुर जनपद और बालगृह प्रबंधन का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।
अब दफ्तरों के चक्कर नहीं, प्रक्रिया 100 प्रतिशत ऑनलाइन
योजना को और अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए 19 दिसंबर 2025 से आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। अब आवेदकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। विभागीय वेबसाइट (उइेलनच.पद) पर घर बैठे मोबाइल या लैपटॉप से आवेदन किया जा सकता है। जांच और जिला अनुमोदन कमेटी की स्वीकृति के बाद सहायता राशि सीधे बच्चे के व्यक्तिगत बैंक खाते में पहुंचने लगती है। ध्यान रहे, पैसा अभिभावक या जॉइंट खाते में नहीं भेजा जाता है।
दो चरणों में 23 साल की उम्र तक मिलता है लाभ
जिला प्रोबेशन अधिकारी श्रीमती ईरा आर्या के अनुसार इस योजना का लाभ बच्चों को दो चरणों में दिया जाता है। पहले चरण में 0 से 18 वर्ष तक स्कूली शिक्षा के लिए सहायता दी जाती है। इसके बाद यदि बच्चा स्नातक या डिग्री की पढ़ाई कर रहा है, तो 18 से 23 वर्ष की आयु तक दूसरे चरण का लाभ मिलता है। योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना है, इसलिए आवेदन में स्कूल का प्रमाण-पत्र लगाना अनिवार्य किया गया है।
जिले में 226 बच्चों को मिला आसरा, जानिए योजनाओं का अंतर
रामपुर में अब तक कुल 226 बच्चों के आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं। कोविड से अनाथ हुए 123 बच्चों को स्वीकृति मिली थी, जिनमें से 54 बच्चों को वर्तमान में 4000 रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं। वहीं, सामान्य योजना के तहत 103 में से 67 बच्चों को 2500 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। इसके अलावा 49 बच्चों को केंद्र सरकार की स्पॉन्सरशिप योजना (4000 रुपये प्रतिमाह) में स्थानांतरित किया गया है। कोविड योजना में कक्षा 9 से ऊपर पढ़ने वालों को लैपटॉप और बालिकाओं की शादी के लिए 1,01,000 रुपये का अनुदान मिलता है, जबकि सामान्य योजना में ये अतिरिक्त प्रावधान नहीं हैं।
जिलाधिकारी का सख्त निर्देश और संकल्प’
जिलाधिकारी ने इस अवसर पर कहा हमारा लक्ष्य है कि कोई भी अनाथ बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। योजना को अब पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन कर दिया गया है। इन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और संरक्षण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर पात्र बच्चे को 23 वर्ष की आयु तक सरकार का पूरा संबल मिलेगा और उनके अधिकारों की रक्षा की जाएगी।