परिजनों ने पुलिस पर दो आरोपियों की गिरफ्तारी न करने और मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाने का लगाया आरोप, डीएम से निष्पक्ष जांच की मांग*
मंडल प्रभारी अवनीत कुमार शर्मा
रामपुर। टांडा थाना क्षेत्र के मोहल्ला दुलीवाला निवासी कैलाश चन्द्र ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर अपनी 22 वर्षीय पुत्री स्वाति के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में निष्पक्ष जांच तथा आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता ने टांडा पुलिस पर मामले में कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप भी लगाए हैं शिकायत के मुताबिक स्वाति का करीब दो वर्ष से मोहल्ला दुलीवाला निवासी अनिल पुत्र सोरन लाल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। आरोप है कि अनिल ने स्वाति की अश्लील वीडियो और फोटो अपने मोबाइल में रख लिए थे और संबंध नहीं बनाने पर उन्हें वायरल करने की धमकी देता था शिकायतकर्ता का आरोप है कि 21 अगस्त 2026 की सुबह करीब 4:30 बजे अनिल ने स्वाति को बुलाया। इसके बाद अनिल पुत्र सोरन और विनोद पुत्र मुरारी कथित तौर पर उसे जंगल में विनोद के खेत पर ले गए। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दोनों ने मिलकर स्वाति के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और बाद में उसकी हत्या कर शव पेड़ पर लटका दिया परिजनों की शिकायत पर टांडा थाने में मु0अ0सं0-299/2026 के तहत धारा 103(1), 70(1), 352 व 3(5) में मुकदमा दर्ज किए जाने का उल्लेख शिकायती पत्र में किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार अनिल पुत्र सोरन लाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जबकि विनोद पुत्र मुरारी लाल और सोरन पुत्र हीरालाल की गिरफ्तारी नहीं हुई है परिवार का आरोप है कि नामजद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और मुकदमा वापस लेने के लिए घर आकर धमकियां दे रहे हैं। शिकायतकर्ता ने कहा कि वह सीधा-सादा व्यक्ति है और आरोपियों से मुकाबला करने में सक्षम नहीं है। इसी कारण परिवार में भय का माहौल बना हुआ है शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस द्वारा मामले की विवेचना को दूसरी दिशा में ले जाने का प्रयास किया जा रहा है तथा घटना से संबंधित सीसीटीवी वीडियो उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें देखा नहीं जा रहा है। पीड़ित परिवार ने मामले की विवेचना किसी अन्य थाना अथवा उच्च अधिकारी से कराए जाने की मांग की है कैलाश चन्द्र ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि परिवार को न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर हो सकते हैं नोट: शिकायती पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।