वेदांता के नंद घर ने पोषण क्रांति को दी नई दिशा माताओं को सशक्त बनाकर बच्चों का भविष्य कर रहा है उज्ज्वल ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय

लखनऊ। 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के समापन अवसर पर, वेदांता की सामाजिक प्रभाव इकाई अनिल अग्रवाल फाउंडेशन की प्रमुख पहल नंद घर ने पोषण को परिवार और समुदाय की साझा प्राथमिकता बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। ‘नंद घर का मिशन, संपूर्ण पोषण’ के अंतर्गत आयोजित विभिन्न पहलों के माध्यम से नंद घर ने बच्चों, माताओं, पिताओं और समुदायों को एक साथ जोड़कर पोषण संबंधी जागरूकता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का प्रयास किया नंद घर की सीईओ शशि अरोड़ा ने कहा हमारे चेयरमैन श्री अनिल अग्रवाल का नंद घर के लिए दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चा बेहतर पोषण, शिक्षा और देखभाल के माध्यम से आगे बढ़े, साथ ही महिलाओं को स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य के निर्माण के लिए सशक्त बनाया जाए। हमारा मानना है कि कुपोषण की जड़ों से मुकाबला करने के लिए जागरूक और सक्षम माताएं, सहयोगी परिवार तथा अपनी आजीविका को सुदृढ़ करने के अवसर प्राप्त महिलाओं की आवश्यकता है। जब महिलाओं के पास सही जानकारी, निर्णय लेने की क्षमता और आर्थिक अवसर होते हैं, तो इसका लाभ उनके बच्चों और पूरे परिवार तक पहुंचता है। भारत सरकार के पोषण अभियान 2.0 के अनुरूप हमारा लक्ष्य पोषण को एक सतत सामुदायिक आंदोलन में बदलना है, जो नंद घर से लेकर देश के हर घर तक सकारात्मक बदलाव लेकर आए भारत सरकार द्वारा पोषण अभियान 2.0 के तहत संचालित राष्ट्रीय पोषण माह का उद्देश्य परिवारों, समुदायों, फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और संस्थाओं के सामूहिक सहयोग से पोषण को एक जन आंदोलन में बदलना है। इसी दृष्टि को आगे बढ़ाते हुए, नंद घर का दृष्टिकोण केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि घरों और समुदायों में व्यावहारिक एवं टिकाऊ पोषण संबंधी आदतों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है नंद घर आधुनिक और तकनीक-सक्षम केंद्रों के माध्यम से भारत के आंगनवाड़ी तंत्र को सशक्त बना रहा है, जहां पोषण, प्रारंभिक बाल देखभाल एवं शिक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं और महिला सशक्तीकरण को एकीकृत किया गया है। 18 राज्यों में 16,000 से अधिक नंद घरों के माध्यम से यह पहल 5 लाख से अधिक बच्चों और 4 लाख महिलाओं के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही है, जिससे बाल विकास को बढ़ावा मिल रहा है और समुदाय स्तर पर महिलाओं की भूमिका और निर्णय क्षमता मजबूत हो रही है स्वस्थ मां, स्वस्थ बच्चा: महिलाओं को पोषण के केंद्र में रखना नंद घर का मानना है कि किसी बच्चे का पोषण स्तर उसकी मां के स्वास्थ्य, ज्ञान और निर्णय लेने की क्षमता से गहराई से जुड़ा होता है। महिलाओं को संतुलित भोजन संबंधी जानकारी, सामुदायिक सहयोग और आजीविका सुदृढ़ करने के अवसर प्रदान कर स्वस्थ परिवारों और बेहतर पोषण परिणामों का निर्माण किया जा सकता है पोषण माह के दौरान, पोषण विशेषज्ञ डॉ. वंदना वर्मा के साथ आयोजित विशेष सत्र सहित कई विशेषज्ञ-नेतृत्व वाली चर्चाओं ने माताओं और देखभालकर्ताओं को बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों, संतुलित आहार तथा दैनिक भोजन में पौष्टिक सामग्री को शामिल करने के व्यावहारिक तरीकों के बारे में जानकारी दी। इन संवादों ने प्रश्नों के समाधान, अनुभव साझा करने और स्वस्थ खानपान अपनाने के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया मां की रसोई से बच्चों की थाली तक: पोषण को बनाना दैनिक अभ्यास मदर्स फूड प्रिपरेशन प्रोग्राम स्थानीय महिलाओं के पारंपरिक ज्ञान का उपयोग करते हुए बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन की आदतों को बढ़ावा देता है और समुदाय की भागीदारी को मजबूत करता है। माताओं को भोजन तैयार करने की प्रक्रिया में एक साथ जोड़कर यह कार्यक्रम ज्ञान साझा करने, स्वस्थ भोजन पकाने के तरीकों को प्रदर्शित करने और पोषण को सामूहिक जिम्मेदारी बनाने का अवसर प्रदान करता है अब तक इस कार्यक्रम से लगभग 2 लाख माताएं जुड़ चुकी हैं और इसके माध्यम से करीब 15 लाख भोजन परोसे जा चुके हैं। यह बच्चों तक पौष्टिक भोजन पहुंचाने में सामुदायिक भागीदारी की शक्ति को दर्शाता है। भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ यह पहल माताओं को अपने बच्चों की पोषण यात्रा में सक्रिय भागीदार बनने के लिए प्रेरित करती है, जिससे स्वस्थ आदतें नंद घर से निकलकर उनके घरों तक पहुंचती हैं इसी आधार को आगे बढ़ाते हुए, नंद घर की पोषण माह गतिविधियों ने बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस संवाद में शामिल किया, ताकि यह संदेश सुदृढ़ हो सके कि स्थायी पोषण परिवर्तन बचपन से शुरू होता है और घर में सामूहिक प्रयासों से कायम रहता है।